खून बहने से होने वाली मौतें अक्सर दुर्घटनाओं, सर्जरी या अन्य चोटों के दौरान होती हैं। इन घटनाओं में खून के अत्यधिक बहने से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई ड्रेसिंग विकसित की है जो रक्तस्राव को तेजी से रोकने में मदद करेगी।
जेरोजेल ड्रेसिंग: रक्तस्राव पर प्रभावी नियंत्रण
भारतीय वैज्ञानिकों ने सिलिका नैनोकणों और कैल्शियम का उपयोग करके एक विशेष जेरोजेल ड्रेसिंग तैयार की है, जो रक्त को जल्दी जमाने में मदद करती है। इस ड्रेसिंग ने व्यावसायिक ड्रेसिंग की तुलना में रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को 13 गुना तेज कर दिया है। इसे हेमोस्टेटिक ड्रेसिंग कहा जाता है, क्योंकि यह रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए डिजाइन की गई है।
रक्तस्राव को नियंत्रित करने की चुनौती
अधिकतर दुर्घटनाओं और ऑपरेशनों के दौरान रक्तस्राव अनियंत्रित हो सकता है, जिसके कारण मृत्यु हो सकती है। आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली रूई (गॉज) जैसी प्राथमिक चिकित्सा सामग्री रक्तस्राव को रोकने में पूरी तरह सक्षम नहीं होती है। इसके कारण खून का बहना जारी रहता है, जिससे मृत्यु का खतरा पैदा हो जाता है।
जेरोजेल ड्रेसिंग के फायदे
इस नई ड्रेसिंग का प्रमुख लाभ यह है कि यह खून के थक्के जमने की प्रक्रिया को तेज करती है। जेरोजेल में सिलिका नैनोकणों और कैल्शियम का समावेश इसे और अधिक प्रभावी बनाता है। इसके हाइली पोरस (बहुत छिद्रयुक्त) होने से यह रक्त को जल्दी अवशोषित कर लेती है और प्लेटलेट्स को सक्रिय करती है, जो रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।
कैसे काम करती है जेरोजेल ड्रेसिंग?
यह ड्रेसिंग प्लेटलेट्स के आकार में बदलाव, कैल्शियम का स्राव और प्लेटलेट सतह पर रिसेप्टर्स की सक्रियता को बढ़ाती है। इससे प्लेटलेट्स का इकट्ठा होना और रक्त के थक्के बनना तेज़ हो जाता है। जेरोजेल ड्रेसिंग ने रक्तस्राव को रोकने की क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार किया है, और इसे रक्तसंचार प्रक्रिया में सक्रिय रूप से मददगार पाया गया है।
संभावित उपयोग और प्रभाव
इस जेरोजेल हेमोस्टेटिक ड्रेसिंग का इस्तेमाल दुर्घटनाओं, सर्जरी और युद्ध में घायल सैनिकों के इलाज में किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ड्रेसिंग रक्तस्राव से होने वाली मृत्यु दर को कम करने में सहायक साबित हो सकती है।
