आजकल पान का सेवन एक फैशन स्टेटमेंट के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके चिकित्सीय गुणों को लोग भूलते जा रहे हैं। एक समय था जब पान हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा था। लोग इसे पनवाड़ी से लेते थे और कई लोग इसे घर लाकर सुपारी, चूना, लौंग, इलायची, सौंफ, केसर, नारियल और गुलकंद के साथ चाव से खाते थे। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने और सांसों को ताजगी देने का एक पारंपरिक तरीका था।
पान के स्वास्थ्य लाभ
पान में कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। यह पाचन तंत्र को ठीक रखने, खांसी दूर करने, और मुंह को सुगंधित बनाने के लिए जाना जाता था। उत्तर प्रदेश में नई मां को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए 15 दिनों तक पान का सेवन कराया जाता था। पान के पत्तों को घी में भूनकर या फिर सरसों के तेल में भिगोकर छाती पर लगाने से खांसी और सांसों की समस्याओं से राहत मिलती थी।
पान का उपयोग कई पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी किया जाता रहा है। चरक और सुश्रुत संहिता में पान के पत्ते का उल्लेख किया गया है, जिसमें इसे पाचन को सुधारने, खांसी दूर करने, और मुंह को ताजगी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
पान का बदलाव: तंबाकू और नशीले पदार्थों का प्रभाव
समकालीन भारत में पान का सेवन अब अधिकतर तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के साथ जुड़ा हुआ है, जो दीवारों पर लाल थूक की पहचान बन चुका है। 16वीं शताब्दी के आसपास पुर्तगाली हमलावरों द्वारा तंबाकू लाए जाने के बाद पान के सेवन का तरीका बदल गया। पहले पान के पत्तों को चबाया और निगला जाता था, लेकिन अब तंबाकू के साथ इसे चबाकर थूकने की आदत बन गई है।
पान के नए प्रयोग: स्वाद और नवाचार
नए स्वादों और प्रयोगों की चाहत रखने वाले युवा पान के पत्ते को चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी और मिर्च के साथ मिलाकर नया अनुभव कर रहे हैं। यहां तक कि पान को आइसक्रीम, पेठा, और बर्फी जैसी पारंपरिक मिठाइयों में भी शामिल किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर तो पान के पत्तों को आग से जलाकर शोले के रूप में मुंह में डाला जाता है।
पान के रोगाणुरोधी गुण
पान के पत्तों में कई चिकित्सीय गुण होते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण गुण इसका रोगाणुरोधी प्रभाव है। शोध से यह भी पता चला है कि पान के पत्तों का अर्क, एसेंसियल ऑयल और आइसोलेट्स सूक्ष्मजीवों के विकास को रोक सकते हैं। यह विभिन्न बैक्टीरिया और कवक को मारने में प्रभावी साबित हो सकता है।
इंडोनेशिया के शोधकर्ताओं ने यह सुझाव दिया है कि पान के पौधे का उपयोग नए एंटीबायोटिक्स तैयार करने में किया जा सकता है। पान के पत्तों के अर्क का उपयोग स्ट्रेप्टोमाइसिन, क्लोरैम्फेनिकॉल और जेंटामाइसिन जैसी दवाओं के साथ करने से उनके जीवाणुरोधी गुण बढ़ जाते हैं।
पान की खेती पर संकट
आजकल पान की खेती धीरे-धीरे मुश्किल होती जा रही है। जलवायु परिवर्तन और अप्रत्याशित मौसम ने पान की खेती को प्रभावित किया है। उत्तरप्रदेश के महोबा जिले में पिछले कुछ सालों से अत्यधिक ठंड और पाले के कारण पान की फसल बर्बाद हो रही है। अकेले महोबा में पान की फसल का रकबा 90 प्रतिशत से अधिक घट चुका है।
पान की किस्में और उनके स्वास्थ्य लाभ
भारत में पान की विभिन्न किस्में पाई जाती हैं। बिहार का मघई पान, उत्तर प्रदेश का महोबा पान, मध्य प्रदेश का देसावरी पान, तमिलनाडु का औथूर पान और वाराणसी का बनारसी पान प्रमुख हैं। इन पत्तों का आकार, स्वाद और करारापन अलग-अलग होता है, और ये दुनिया भर में काफी प्रसिद्ध हैं।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडीए) के अनुसार, भारत ने 2022-23 में दुनिया को 3,440.08 मीट्रिक टन पान के पत्तों का निर्यात किया है, जिसकी कीमत 49.68 करोड़ रुपए थी।
पान रसम – एक पारंपरिक व्यंजन
सामग्री
पान के पत्ते : 2
टमाटर : 1
अरहर दाल : 1 चम्मच
सौंफ : आधा चम्मच
धनिया साबूत : आधा चम्मच
जीरा : आधा चम्मच
इमली का रस : 1 बड़ा चम्मच
काली मिर्च : आधा चम्मच
लाल मिर्च साबूत : 1
सरसों : आधा चम्मच
घी : 1 चम्मच
गुड़ : 1 चम्मच
नमक : स्वादानुसार
विधि
सौंफ, धनिया, काली मिर्च और जीरे को भूनकर मोटा पीस लें। अब दाल को उबालें और उसमें पान के पत्ते और टमाटर डालें। मसाले, दाल, पान और टमाटर का मिश्रण, इमली का रस, नमक और गुड़ मिक्सी में चला दें। अब एक पैन में मिश्रण को उबालें। एक चम्मच में घी, सरसों, करी पत्ता और मिर्च का तड़का बनाकर रसम में मिला लें और इसका स्वाद लें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
