आजकल बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर टेढ़े-मेढ़े और बेडौल दिखने वाले फल और सब्जियां बिना किसी ध्यान के कूड़े में फेंक दिए जाते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों को आमतौर पर इसलिए नजरअंदाज किया जाता है क्योंकि वे दिखने में आकर्षक नहीं होते। हालांकि इनकी पोषण की गुणवत्ता उच्च होती है और इन्हें सही तरीके से उपयोग में लाकर भुखमरी और कुपोषण से लड़ने में मदद की जा सकती है।
खाद्य अपव्यय की गंभीरता
खाद्य और कृषि संगठन का अनुमान है कि दुनिया में उत्पादित भोजन का लगभग एक तिहाई हिस्सा बर्बाद हो जाता है। विकसित देशों में यह आंकड़ा और भी अधिक है। विकसित देशों में 680 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बर्बादी होती है, जबकि विकासशील देशों में यह आंकड़ा 310 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारत में भी यह स्थिति गंभीर है, जहां अनुमानित तौर पर 40 प्रतिशत भोजन बर्बाद हो जाता है।
खाद्य बर्बादी के खिलाफ बढ़ता जागरूकता आंदोलन
हाल के वर्षों में भोजन की बर्बादी के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है। कई रेस्तरां और कंपनियां अब टेढ़े-मेढ़े और बेडौल फलों और सब्जियों का उपयोग कर उन्हें नई और स्वादिष्ट डिश बनाने में लगा रही हैं। उदाहरण के लिए सैन फ्रांसिस्को में पिज्जा रेस्तरां में विकृत मिर्च और टमाटर का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार के खाद्य पदार्थों को रिसायकल करने का प्रयास कई शहरों में चल रहा है।
भारत में स्थानीय पहलें
भारत में भी इस समस्या का समाधान पाया जा रहा है। ओखला मंडी में बेडौल फलों और सब्जियों को कम कीमत पर बेचा जाता है, और ये अधिकांशतः गरीबों द्वारा खरीदी जाती हैं। सब्जी विक्रेता बताते हैं कि इन बेडौल फलों और सब्जियों का इस्तेमाल ढाबों और गरीबों के घरों में किया जाता है, और इस प्रकार ये बर्बाद नहीं होते। वहीं दागी या बेमुकाम फल और सब्जियां किसी के लिए बेकार नहीं होतीं, और इन्हें दूसरे रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
साहित्य और सांस्कृतिक महत्व
“अग्ली फूड्स: ओवरलुक्ड एंड अंडरकुक्ड” पुस्तक में भी इस मुद्दे को उठाया गया है। इसमें यह बताया गया है कि कैसे मांसाहारी खाद्य पदार्थ जैसे खरगोश, गिलहरी, और मच्छी के कुछ हिस्से जैसे सिर और पैर, हमारी थाली से गायब हो गए हैं, जबकि ये पोषण से भरपूर और सस्ते होते थे। इसी प्रकार, भारत में आदिवासी समुदायों द्वारा उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थ, जैसे चींटी की चटनी या चूहा, अब मुख्यधारा में नहीं हैं।
औद्योगिक भोजन और स्वास्थ्य
औद्योगिक खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता बढ़ी है, क्योंकि इन्हें पैक करना आसान होता है और वे लंबे समय तक चलते हैं। लेकिन इसके परिणामस्वरूप लोग पौष्टिक और घर के बने खाने की बजाय जंक फूड को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिसके कारण बीमारियों में वृद्धि हुई है।
विविधता की कमी और जैव विविधता का संरक्षण
जैव विविधता की कमी की वजह से हम पारंपरिक खाद्य पदार्थों को खो रहे हैं। विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन और किसी जानवर या पौधे के सभी हिस्सों का उपयोग करना भोजन की बर्बादी को कम करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। लेकिन इस ज्ञान की लुप्त होती जा रही है।
