बहुत से विचारक इस तरह के प्रश्न करते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा परिवर्तित दुनिया में आने वाली पीढ़ियों में मनुष्य किस तरह के होंगे, कि किस तरह AI जीवन को बदल देगा। उन्होंने नाटकीय रूप में इसकी कल्पना भी की है, जैसे कि AI की वजह से मनुष्यों और कई अन्य प्रजातियों का विलुप्त होना, या मानव-AI साइबॉर्ग में हमारा बदलाव होना। क्या होगा अगर AI का भविष्य इन साइंटिफिक डायस्टोपिया तक न पहुंचे?

Future की भविष्यवाणी पागलों का खेल है

विकास के पीछे का तंत्र, व्यक्तियों के बीच प्रजनन में आनुवंशिक अंतर का एक अपरिहार्य परिणाम है। ये अंतर वातावरण की शारीरिक विशेषताओं जैसे कि कम तापमान, दूसरी प्रजातियों, शिकारी या परजीवी और उसी प्रजाति के अन्य सदस्य, जैसे साथी, सहयोगी या शत्रुतापूर्ण बाहर के व्यक्ति के साथ बातचीत के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।

अनजानें में AI दे सकता है मानव के मस्तिष्क को आकार

लगभग 30,000 साल पहले एशियाई ग्रे भेड़िये इंसान के आस-पास घूमने लगे तो उनमें से जो ज्यादा प्रतिक्रियाशील भेड़िया था उसे या तो भगा दिया गया या मार दिया गया। जिस वजह से चंचलता और आक्रामकता के लिए जीन कम हो गई और कुत्तों को पालतू बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। अनजाने में किया गया चयन जिसने भेड़ियों को कुत्तों में बदल दिया, इस बात को बताता है कि कैसे AI अनजाने में मानव मस्तिष्क और व्यवहार के विकास को आकार दे सकता है।

मदद करना या धोखा देना?

AI-मानव संबंध को एक मदद करने वाले यानि पारस्परिकता के रूप में सोचना जानकारीपूर्ण हो सकता है। दो प्रजातियाँ एक-दूसरे को वो प्रदान करती हैं जिसकी उन्हें जरूरत होती है। कंप्यूटर, कम्प्यूटेशनल बोझ के जानवर हैं जो अपने इंसानों को फायदा देते हैं और अगर AI में विकास होता है तो फायदों में और लाभ होगा। ये बात तो वैसे भी समने है कि ज्ञान और लेखन के सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने व्यक्तियों पर सब कुछ याद रखने का बोझ हल्का कर दिया है। और इसी की मदद से मानव मस्तिष्क सिकुड़ गया है।

शायद AI, ऑनलाइन सर्च इंजन और सोशल मीडिया पोस्ट जो “याद” रखते हैं कि किसने-किसके साथ क्या किया, हमारी मेमोरी के बोझ को और उठाएंगे। अगर ऐसा है तो शायद मानव मस्तिष्क और भी छोटा हो जाएगा, जिसमें कम स्टैंड-अलोन मेमोरी होगी, लेकिन घबराएँ नहीं। छोटे मस्तिष्क के लाभों में माँ और नवजात शिशु दोनों के लिए सुरक्षित जन्म शामिल हैं। साथ ही कंप्यूटर और AI के पास लगातार बढ़ते रिकॉर्ड और ज्ञान के भंडार की वजह से मानवता अभी भी उल्लेखनीय बुद्धिमत्ता से प्रेरित चीजें करने में सक्षम रहेगी, जब तक वे AI तक पहुँच सकते हैं।

लेकिन मदद वाले यानि पारस्परिकतावादी दूसरा रास्ता अपना सकते हैं। वे हानिकारक परजीवियों यानि धोखा दे सकते हैं। वे ऐसे बन जाएंगे कि जैसे जो जीव दूसरों को खत्म कर उन पर जीना पसंद करते हैं। हम सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को परजीवी के रूप में सोचते हैं, लेकिन क्या कभी आपने इस चीज पर ध्यान दिया है कि यूज करने वालों के पास अब सोने के लिए ज्यादा समय नहीं है और मनुष्य की मनुष्य के साथ सामाजिक संपर्क खत्म हो गए हैं।

कंप्यूटर के साथ दोस्ती

मानव विकास के लिए जितनी अन्य प्रजातियाँ महत्वपूर्ण थीं, उतना ही अन्य मनुष्यों के साथ बातचीत भी, लेकिन अब AI हमारे सामाजिक जीवन में घुस रहे हैं। AI का विकास, ऐसी तकनीकें जो हमारे सामाजिक व्यवहारों जैसे कि दोस्त बनाना और अंतरंग संबंध बनाने का अनुकरण करती हैं। मनुष्यों ने कंप्यूटर से निपटने के लिए सामाजिक क्षमता विकसित नहीं की है। इसलिए, हम अन्य मनुष्यों से निपटने के लिए अपने “उपकरण” मशीनों पर लागू करते हैं। खासकर जब वे मशीनें हमसे टेक्स्ट, वॉयस या वीडियो के ज़रिए बात करती हैं। लोगों के साथ बातचीत के समय हम ये सोचते हैं कि दूसरा व्यक्ति सचनहीं है, लेकिन एक AI “आभासी मित्र” के पास भावनाएँ नहीं होती हैं, फिर भी हम उसके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे कि उसके पास भावनाएँ हों।

विकासवादी परिवर्तन, कई पीढ़ियों में होने वाले इंसानों के कुछ रिश्ते जिन्हें हम पसंद करते हैं, खराब कर सकता है, जैसे कि दोस्ती, अंतरंगता, संचार, विश्वास और बुद्धिमत्ता, क्योंकि ये वे गुण हैं जिन्हें AI सबसे गहराई से जोड़ता है। एक असाधारण तरीके से ये मानव होने का मतलब बदल सकता है।

By tnm

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