दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है, ऐसे में डब्ल्यूएचओ ने भारत से 28वें सम्मेलन (COP28) में प्रस्तुत जलवायु स्वास्थ्य प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर करने का पुन: आह्वान किया है। आपको बता दें कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन बीते साल दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया गया था।
COP28
बता दें कि जलवायु और स्वास्थ्य पर सीओपी28 (COP28) यूएई घोषणापत्र जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य प्रभावों से निपटने के लिए एक वैश्विक प्रतिबद्धता है। इसका काम जलवायु स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और जलवायु और स्वास्थ्य के प्रतिच्छेदन को संबोधित करने जैसे कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना होता है।
भारत दुनिया के सबसे ज़्यादा जलवायु-संवेदनशील देशों में से एक है, लेकिन शपथ लेने के एक साल बाद भी वैश्विक पहल में शामिल होना अभी बाकी है। इस बात की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक निर्धारक निदेशक मारिया नीरा ने की। हाल ही में बाकू, अज़रबैजान में संपन्न COP29 के दौरान भी बात की गई।
भारत के हस्ताक्षर करने पर आनाकानी
नीरा का कहना है कि भारत ने इस प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। भारत के हस्ताक्षर करने में दिखाई जा रही अनिच्छा लगातार सवाल खड़े कर रही है। खासकर जब भारत के नागरिक जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले भयंकर प्रभावों से जूझ रहे हैं।
प्रदूषण के आंकड़ों बढ़ने की स्थिती में
नीरा ने दिल्ली में खतरनाक स्तर के देखते नीरा ने कहा कि भारत को अब इस पहल में शामिल हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अब शायद एक बड़े प्रयास की जरूरत है, क्योंकि अखबारों में लगातार बढ़ते आंकड़े बताते हैं, जैसे कि नई दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर बहुत अधिक है। उन्हें आस है कि भारत जल्द ही इन प्रयासों में शामिल हो जाएगा।
जानकारी के अनुसार WHO के साथ कोविड-19 से होने वाली मौतों और वायु प्रदूषण के आंकड़ों को लेकर मतभेद, शपथ से बचने का असली कारण बताया जा रहा है।
भारतीय विशेषज्ञों का प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर न करने पर चिंता व्यक्त करना
श्वेता नारायण, जोकि भारत की स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं, ने जलवायु से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी संकल्प को भारत द्वारा लगातार अस्वीकार किए जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उनका कहना है कि भारत ने अपने G20 प्रेसीडेंसी के दौरान जलवायु कार्रवाई में मजबूत नेतृत्व दिखाया था।
इसमें नई दिल्ली घोषणापत्र में जलवायु और स्वास्थ्य के बीच महत्वपूर्ण संबंधों पर जोर दिया गया और एक उम्मीद जगी कि इस गति से डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व में जलवायु और स्वास्थ्य घोषणापत्र को बढ़ावा मिलेगा और ये एक 1.4 बिलियन नागरिकों की भलाई की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। फिर भी, भारत की हिचकिचाहट हैरान करने वाली है।
