सर्दियों का मौसम तो आ चुका है, लेकिन डेंगू के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। पटियाला जिले के पातड़ां शहर में डेंगू का कहर तेजी से बढ़ रहा है, और इस खतरनाक बीमारी के कारण अब तक एक 14 वर्षीय लड़के की जान जा चुकी है। शहरभर में डेंगू से प्रभावित कई मरीजों का इलाज चल रहा है, लेकिन सरकारी सुविधाओं की कमी और निजी अस्पतालों में इलाज की बढ़ती लागत ने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
14 वर्षीय अंस सिंगला की मौत
पातड़ां की अमरीक कॉलोनी में रहने वाले विजय कुमार ने बताया कि उनके बेटे अंस सिंगला की तबीयत कुछ दिन पहले बिगड़ी थी। शुरुआत में उसे पातड़ां में इलाज दिया गया, लेकिन जैसे-जैसे उसकी स्थिति खराब हुई, उसे पटियाला के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर उसे हरियाणा के टोहाना शहर के अस्पताल में भेजा गया, लेकिन हालत बिगड़ने के बाद उसे डी.एम.सी. लुधियाना ले जाया गया। वहां उसकी डेंगू से मौत हो गई। यह घटना शहरवासियों के लिए एक बड़ा झटका है और डेंगू के खतरों को लेकर चिंताओं को बढ़ा रही है।
शहरवासियों का आरोप
स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि डेंगू के मरीजों का इलाज विभिन्न निजी अस्पतालों में किया जा रहा है, लेकिन पातड़ां इलाके में एक अच्छा सरकारी अस्पताल न होने के कारण लोग महंगे इलाज का शिकार हो रहे हैं। इसके कारण शहरवासियों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और इलाज की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। नगर परिषद पातड़ां के अध्यक्ष रणवीर सिंह यादव ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और बताया कि नगर परिषद के कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर डेंगू के खिलाफ जागरूकता फैलाने और रोकथाम के लिए काम कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
पातड़ां में डेंगू के लार्वा की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सक्रिय रूप से कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य सुपरवाइजर कपिल कुमार के अनुसार एक ड्राई डे पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 600 घरों में जाकर डेंगू के लार्वा की जांच की। इस दौरान करीब 2 दर्जन घरों में डेंगू के लार्वा पाए गए, जिन्हें तुरंत नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग लगातार डेंगू की रोकथाम के लिए अलग-अलग कदम उठा रहे हैं, ताकि इस बीमारी के फैलाव को रोका जा सके और लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
