भारत में आजकल प्रदूषण की समस्या बहुत हो चुकी है। यहां की राजधानी दिल्ली में तो AQI 400 से पार ही जा रहा है। ऐसे में सबसे बेस्ट शहरों की सूची में भारत का कोई शहर शामिल नहीं है। न ही दिल्ली और न ही मुबंई। इस रिपोर्ट में 31 देशों के लगभग 22000 लोगों की राय ली गई। जिस के बाद लंदन इस रेंकिंग में पहले स्थान पर आया है। लंदन ने न्यूयॉर्क, पेरिस और टोक्यो जैसे नामी शहरों को पीछे छोड़कर जगह बनाई है। आपको बता दें कि लंदन ही वे शहर था जहां 1952 में ग्रेट स्मॉग ऑफ लंदन जैसी घटना हुई थी।
Great Smog of London

1952 में करीब 5 से 9 दिसंबर के बीच घनी जहरीली धुंध ने लंदन को अपनी चपेट में ले लिया था। इतनी गहरी धुंध थी कि कुछ दूरी के लोग भी दिखने मुश्किल हो रहे थे। इस वजह से सारी सड़कें सुनसान हो गई थीं, ट्रेन और फ्लाइट्स पूरी तरह रद्द हो चुकी थीं और लोग अस्पतालों में भर्ती हो रहे थे।
इसका क्या कारण था?
उस समय लंदन में कोयले का इस्तेमाल काफी किया जाता था। घरों में गर्मी के लिए इसे यूज करते थे, जिस कारण सारा औद्योगिक प्रदूषण वातावरण में इकट्ठा हो गया था। और हवा की नमी और कराब मौसम की वजह से ये और ज्यादा खराब हो गया था। इस वजह से वातावरण काफी जहरीला बन गया था। इस वातावरण की वजह से 12000 से ज्यादा मौतें हुईं और करीब 1 लाख लोग अस्पताल में भर्ती थे। रेस्पिरेटरी सिस्टम से संबंधित काफी बीमारियों का सामना करना पड़ा।
इस तरह खत्म हुई स्मॉग

9 दिसंबर को ये मौसम साफ हुआ। हवा तेज हुई और स्मॉग खत्म हुई, लेकिन इस घटना ने लंदने के लोगों को जागरूक कर दिया। इसके बाद लंदन में 1956 क्लीन एयर एक्ट लागू हुआ। इसमें कोयले के यूज पर बैन लगा दिया गया। इस एक्ट में हवा को नियंत्रण करना और उसे साफ रखना था।
दिल्ली में प्रदूषण के कारण

बात दिल्ली करें तो 19 नवंबर को दिल्ली AQI 494 थी। इसे सोचकर ही इंसान कांप जाए, दिल्ली के लोग तो फिर इसे झेल रहे हैं। इसके बहुत से कारण हैं, जैसे कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से, पेट्रोल और डीजल की गाड़ियों में लगातार बढ़ौतरी, धूल और कण, कोयले और बाकी ईंधनों का प्रयोग।
ऐसे बचा सकते हैं दिल्ली की हवा को
पेट्रोल और डीजल की गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करें। किसानों को आर्थिक और मशीनी सहायता दी जाए पराली सड़ाने के लिए, सोलर और वंड एनर्जी यूज करें, ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं।
हम भी लंदन की जगह आ सकते हैं, लेकिन सबसे पहले हम और हमारे देश की जनता को जागरूक होने की जरूरत है। उन्हें पता चले कि उनका देश खतरनाक प्रदूषण से गुजर रहा है। लंदन का AQI कम से कम 20 से 30 बीच रहता है और ज्यादा से ज्यादा 60 से 70 के बीच तो लाजमी था कि लंदन ने अपनी जगह बनानी थी।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
