राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है। वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली अब गैस चैंबर बनती जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, सोमवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 746 दर्ज किया गया था। वहीं, दिल्ली के मुंडका समेत कई इलाकों में एक्यूआई 1200 के करीब दर्ज किया गया। दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलने के लिए कहा है। कुल मिलाकर देखा जाए कि दिल्ली में एक्यूआई का स्तर जानलेवा हो गया है। दिल्ली में सिर्फ घर के बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर भी प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। घर के अंदर मौजूद प्रदूषण वयस्कों से ज्यादा नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए हानिकारक होगा। घर के अंदर के प्रदूषण में बच्चों और नवजात शिशुओं का ध्यान कैसे रखा जाए आज इस आर्टिकल के जरिए आपको इस बारे में बताएंगे।
घर के अंदर वायु प्रदूषण का कारण
एक्सपर्ट्स के अनुसार, घर के अंदर वायु प्रदूषण होने का मुख्य कारण बाहर की हवा से आने वाली धूल, मिट्टी, धुआं, पेंट्स का फर और केमिकल्स वाले क्लीनिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल है। इसके अलावा किचन में बनने वाले खाने के कारण भी घर के अंदर प्रदूषण होता है।

वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां
डॉक्टर्स का कहना है कि इनडोर एयर पॉल्यूशन के कारण नवजात शिशुओं और बच्चों को सांस संबंधी परेशानियां, एलर्जी, अस्थमा और स्किन एलर्जी का खतरा होगा।
सांस संबंधी समस्याएं
नवजात शिशुओं की श्वसन प्रणाली बहुत ही सेंसिटिव होती है। इसके कारण इनडोर एयर पॉल्यूशन के कारण उन्हें सांस लेने में कठिनाई और बार-बार खांसी की समस्या हो सकती है।
एलर्जी और अस्थमा
इनडोर एयर पॉल्यूशन के कारण शिशु को एलर्जी और अस्थमा हो सकता है। डॉक्टर्स की मानें, तो जिन घर में पालतू जानवर होते हैं, वहां एलर्जी और अस्थमा का खतरा ज्यादा रहता है।

त्वचा संबंधी समस्याएं
प्रदूषित हवा बच्चों की त्वचा में खुजली, जलन और लालिमा जैसी समस्याओं का कारण बनेगी।
घर के अंदर ऐसे कम करें वायु प्रदूषण का स्तर
घर के अंदर वायु प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए शिशुओं व छोटे बच्चों को इससे बचाने के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते हैं।
घर की सफाई पर दें ध्यान
घर की नियमित रूप से सफाई करें और धूल को हटाएं। घर में वायु में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए रोज सही तरह से झाड़ू-पोछा करें। सोफे और बेड के कोनो को वैक्यूम क्लीनर से साफ करें, ताकि धूल-मिट्टी जमा न हो पाए।
पौधे लगाएं
घर के अंदर मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और एरेका पाम जैसे पौधे लगाएं। इससे वायु की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह पौधे हवा में मौजूद हानिकारक तत्वों को हटाएंगे जिससे हवा साफ होगी।
एयर प्यूरीफायर
घर के अंदर की वायु गुणवत्ता को सुधारने और प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एक सही एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल जरुर करें। यह हवा में मौजूद धूल, धुआं और अन्य हानिकारक कणों को फिल्टर करके हवा को शुद्ध करेंगे। इसके अलावा एयर प्यूरीफायर घर के अंदर मौजूद हवा में बैक्टीरिया और इंफेक्शन को भी कम करेगा। आपके नवजात शिशु और बच्चों के लिए कौन सा एयर प्यूरीफायर सही है, इसके लिए एक बार अपने डॉक्टर से बात करें।
वेंटिलेशन का रखें ध्यान
घर के अंदर ताजी हवा का आना जरूरी है। इन दिनों जब दिल्ली में सुबह और शाम दोनों ही समय वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा है तब घर की खिड़कियों को दोपहर के समय खोलकर करें, ताकि हानिकारक कण बाहर जाएं और ताजी हवा अंदर आ सके।

केमिकल वाले क्लीनिंग प्रोडक्ट
बाजार में मिलने वाले घर को साफ करने वाले क्लीनिंग प्रोडक्ट में कई तरह के केमिकल्स होते हैं। यह केमिकल्स नवजात शिशुओं और बच्चों की त्वचा और श्वसन प्रणाली को प्रभावित करेंगे इसलिए घर की सफाई करने के लिए नैचुरल क्लीनिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पोंछा लगाते समय केमिकल वाले क्लीनिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने की बजाय कपूर या साबुन का इस्तेमाल करें।
इस बात का रखें ध्यान
नवजात शिशुओं और बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हर माता-पिता की पहली जिम्मेदारी है लेकिन जब बात वायु प्रदूषण से बच्चों को बचाने की आती है, तो यह एक मुश्किल काम हो जाता है। वायु प्रदूषण के प्रभाव से बच्चों को बचाने के लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा समय तक घर के अंदर ही रखें।
