हरियाणा के महेन्द्रगढ़ में एक अनूठी शादी हुई, जिसने समाज में दहेज प्रथा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया। दूल्हे अवशेष यादव, जो वेटरनरी डॉक्टर हैं, और दुल्हन वंदना यादव, जो नर्स हैं, ने अपनी शादी में दहेज के लेन-देन से इंकार किया। इसके बजाय, शगुन के रूप में 11 पौधे और एक रुपये का आदान-प्रदान किया। इस कदम से दोनों ने दहेज प्रथा का विरोध और पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की।
सामाजिक जागरूकता का संदेश
झज्जर जिले के शिक्षक बिजेंद्र यादव और स्वास्थ्य कर्मी सुभाष यादव ने इस अनूठी शादी की पहल की। उनका मानना है कि समाज में बदलाव लाने के लिए यह जरूरी है कि हम हर स्तर पर सोच में बदलाव लाएं। इस पहल को नेता जी सुभाष चंद्र बोस युवा जागृत सेवा समिति और सदाचारी शिक्षा समिति से प्रेरणा मिली।
पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
वधु पक्ष और वर पक्ष ने एकमत होकर दहेज की जगह पौधों को उपहार में देने का फैसला लिया। दूल्हे अवशेष और दुल्हन वंदना ने कहा कि यह शादी सिर्फ उनके जीवन का अहम मोड़ नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने की दिशा में एक कदम है। उनके अनुसार प्रदूषण और दहेज जैसी सामाजिक बुराईयों के खिलाफ लड़ाई हर किसी को मिलकर लड़नी चाहिए।
विधायक गीता भूक्कल का समर्थन
झज्जर से कांग्रेस विधायक गीता भूक्कल ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर और दहेज प्रथा जैसी बुराईयों के खिलाफ ऐसे कदम उठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस शादी को समाज के लिए एक प्रेरणा बताया और उम्मीद जताई कि अन्य परिवार भी इस पहल का अनुसरण करेंगे।
यह शादी न केवल दहेज प्रथा के विरोध में एक संदेश है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में समाज को और भी जागरूक बना सकता है।
