अपने बारे में जानना बहुत जरूरी होता है, ऐसे में आपको ये भी पता होगा कि आप यानि स्पर्म कहां बनता है, कब बनना शुरू होता है, कहां से आता है और इससे जुड़ी समस्या क्या होती हैं, नहीं? तो कैसे कह सकते हैं कि आप अपने बारे में सब कुछ जानते हैं? ये सब हमें स्कूलों में पढ़ाया जाता है और ये सेक्स एजुकेशन का एक अहम पार्ट है। इसे सिर्फ लड़के ही नहीं लड़कियां भी जानें, ताकि किसी के अंदर भी इससे संबंधित कोई गलतफहमी न हो और बार-बार खानदानी दवाखानों या शफाखानों के चक्कर न लगाने पड़ें। अगर स्कूल में नहीं पढ़ाया गया तो इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।
आखिर क्या होता है Sperm
किशोरावस्था में आने के बाद लड़का और लड़की दोनों के शरीर में काफी तरह के हार्मोनल बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। लड़कियों में पीरियड्स आना, ब्रेस्ट्स डेवलप होना और अंदरूनी जगहों पर बाल आना शुरू हो जाते हैं, वहीं लड़कों में दाढ़ी-मूछें आना, गुप्तांगों के आसपास बाल उगना, आवाज़ में बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। इसी समय लड़कों का शरीर स्पर्म का उत्पादन शुरू कर देता है। स्पर्म को हिंदी में शुक्राणु कहते हैं और ये ऐसा पदार्थ है, जो मनुष्य के प्रजनन के लिए बेहद जरूरी है।
कहां बनते हैं Sperm
स्पर्म पुरुषों के अंडकोष में बनते हैं। अच्छी क्वॉलिटी के स्पर्म के लिए टेंपरेचर लगभग 25 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए जिस कारण पुरुषों के अंडकोष शरीर के बाहर एक थैली में होते हैं। इसका मतलब होता है कि शरीर प्रजनन यानी रीप्रोडक्शन के लिए तैयार होना शुरू हो रहा है। साइंस की भाषा में इसे प्रोडक्टिव सेल या गैमेट कहते हैं। स्पर्म में पहला हेड (न्यूक्लियस) और दूसरा टेल (फ़्लैगेलम) होता है। स्पर्म का टेल तैरने में मदद करता है, ताकि वह महिलाओं के ओवम तक जा सके।
सीमन और स्पर्म एक ही हैं?
अक्सर लोग स्पर्म और सीमन को एक ही मानते हैं, लेकिन दोनों में अंतर है। आपको बता दें कि पुरुषों के स्पर्म सेक्स या हस्तमैथुन के दौरान अकेले बाहर नहीं निकलते, और भी कई तरह के लिक्विड बाहर निकलते हैं। सीमन को स्पर्म और उन दूसरे द्रव्य पदार्थों के मिले-जुले रूप को कहते हैं। अगर स्पर्म अकेले शरीर से बाहर निकलते हैं तो ज़्यादा समय तक जीवित नहीं रह सकते इसलिए वे अपने साथ पोषण से भरपूर द्रव्य पदार्थों को लाते हैं। इसे ही सीमन या वीर्य कहते हैं।
सेक्स या हस्तमैथुन के दौरान निकाले गए सीमन में करीब 15 लाख से 20 करोड़ तक स्पर्म होते हैं और उनमें से सिर्फ एक स्पर्म ही महिला के अंडाणु से फ़र्टिलाइज़ होता है। अब जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है तो पुरुषों के स्पर्म की क्वॉलिटी और क्वॉन्टिटी में गिरावट आने लग जाती है।
उत्तेजना के समय चिपचिपा फ़्लूइड कौन सा निकलता है?
उत्तेजना के समय पुरषों के पीनस से चिपचिता लिक्विड निकलता है, उसे प्री-इजैक्युलेशन फ़्लूइड या प्री कम भी कहते हैं। ये रंगहीन होता है और इसमें स्पर्म नहीं होता। इसे पुरुषों के कॉपर्स ग्लैंड द्वारा स्रवित किया जाता है। इसका अहम काम ये होता है कि सीमन के रास्ते की एसिडिटी को कम करे। इसी वजह से जब सीमन के साथ स्पर्म बाहर आता है तो वे ज्यादा देर तक जीवित रहता है। साथ ही ये स्मूद सेक्शुअल इंटरकोर्स में भी मदद करता है।
कहीं बार ही प्री-कम में स्पर्म होते हैं लेकिन बहुत कम केस में। स्पर्म वाले प्री-कम से प्रेग्नेंसी भी पॉसिबल है। प्री कम का प्री-मैच्योर इजैकुलेशन से कोई संबंध नहीं है। कई लोग प्री-कम को प्री-मैच्योर इजैकुलेशन समझकर परेशान हो जाते हैं। आपको बता दें कि इनमें सिर्फ प्री के अलावा कुछ और समानता नहीं है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
