पूर्व क्रिकेटर संजय बांगड़ की बेटी ने बताया कि वे जन्म के समय लड़का थीं और उसके माता-पिता ने उसका नाम अनाया नहीं आर्यन रखा था। उन्होंने साल 2023 में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी कराई जिससे उसकी पहचान पूरी तरह बदल गई।

Hormone Replacement Therapy

अब हम बात करेंगे कि हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी होती क्या है। जानकारी के अनुसार हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी को जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी भी कहते हैं। ये एक मेडिकल ट्रीटमेंट होता है जो ट्रांसजेंडर लोगों को उनकी शारीरिक विशेषताओं को उनकी जेंटर आइडेंटिटी के साथ अरेंज करने में मदद करता है। आपको बता दें कि जो ट्रांसजेंडर महिलाओं होती हैं वे हार्मोन थेरेपी की मदद से फैट डिस्ट्रीब्यूशन को बदलकर, ब्रेस्ट डेवलपमेंट करवाती हैं। इसकी मदद से मेल-पैटर्न हेयर ग्रोथ कम हो जाता है और फीमेल अपीयरेंस आती है।

आपको बता दें कि इस थेरेपी में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन या फिर दोनों ही शामिल होते हैं। जिन महिलाओं की हिस्टेरेक्टॉमी हुई पड़ी है उनके लिए एस्ट्रोजन थेरेपी ही की जाती है, क्योंकि प्रोजेस्टेरोन गर्भाशय की परत को कैंसर के रिस्क से बचाने के लिए जरूरी है। अब जिन महिलाओं का गर्भाशय अभी भी है उनमें एंडोमेट्रियल कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए कंबाइंड हार्मोन थेरेपी की जाती है।

कितना समय लगता है?

हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का वक्त बताना मुश्किल हो सकता है क्योंकि ये हर किसी की जरूरतों और हेल्थ के मुताबिक होता है। कुछ लोगों को कुछ हफ्तों में ही लक्ष्णों से राहत मिल जाती है और कुछ को समय लगता है। वैसे इसके पूरे असर को महसूस करने में 3 महीने तक का वक्त लग सकता है।

क्यों करवाते हैं लोग सेक्स चेंज

सेक्स चेंज करवाना एक बहुत बड़ा फैसला होता है और बहुत से कारण हो सकते हैं जिसके चलते लोग सेक्स चेंज करवा लेते हैं। लोगों का तो कहना होता है कि कुदरत ने जिस जेंडर में पैदा किया उससे परेशानी क्या है? लेकिन कहीं बार कारण इंसान की इमोशनल, मेंटल, और सोशल नीड से जुड़ा हो सकता है।

Identity change

कई लोगों को अतीत की कुछ बातों को याद नहीं करना होता, क्योंकि उनके साथ कोई घटना हुई होती है, जिसे वे पूरी तरह से भूलाना चाहते होते हैं। इस वजह से भी ये किया जाता है। ऐसे में उन्हें लगता है कि सेक्स चेंज हो गया तो आइडेंटिटी बदल जाती है और पास्ट को भुलाना आसान हो जाता है।

Gender Dysphoria

इस स्थिती में एक इंसान को जन्म से निर्धारित लिंग और अपनी असल पहचान के बीच एक गहरा फर्क महसूस होता है। इस वजह से बेचैनी, टेंशन और डिप्रेशन पैदा हो जाती है। इसलिए फिर वे सर्जरी या हार्मोन थेरेपी के जरिए अपने फिजिकल अपीयरेंस को अपनी अंदरूनी पहचान से मिलाने की कोशिश करते हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

By tnm

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