डॉक्टरों को ऐसे ही भगवान नहीं कहा जाता। वह आए दिन कुछ न कुछ ऐसे चौंकाने वाला कर देते हैं कि लोग भी उन्हें भगवान कह देते हैं। अब हाल ही में गुड़गांव के फोर्टिज मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 55 वर्ष की अफ्रीकी महिला के पेट से 9 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाला कैंसर से बना हुआ ट्यूमर निकाला है। सर्जरी तीन घंटे तक चला। अस्पताल में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. अमित जावेद के नेतृत्व में की गई ट्यूमर के आकार और जरुरी अंगों पर इसके प्रभाव के कारण इसे ज्यादा जटिल माना गया है।
पेट में हो रहा था दर्द
डॉ. अमित ने बताया कि ट्यूमर के कारण पिछले 6-7 महीनों से मरीज के पेट में बहुत तेज दर्द हो रही थी। उसने पहले अफ्रीका के कई अस्पतालों में इलाज करवाया था लेकिन ट्यूमर के आकार और स्थान के कारण होने वाली उच्च जोखिम के कारण सर्जरी से सभी ने इंकार कर दिया था। गुरुग्राम पहुंचने पर सीटी एंजियोग्राफी और पीईटी स्कैन के जरिए व्यापक इमेजिंग से ट्यूमर की संवेदनशीलता और उसके गुर्दे, मूत्र पथ और अन्य जरुीर अंगों पर दबाव का पता चला। उन्होंने कहा कि बड़े आकार के कारण ट्यूमर की उत्पत्ति शुरु में साफ नहीं थी।

9.1 किलोग्राम का था ट्यूमर
आगे उन्होंने बताया कि ट्यूमर का आकार 9.1 किलोग्राम था और इसकी उत्पति के बारे में अनिश्चितता को देखते हुए सर्जरी असाधारण तौर पर चुनौतीपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि – सर्जरी के हमने ट्यूमर को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनर स्टोमल ट्यूमर के तौर पर पहचाना जो कि एक दुर्लभ कैंसर है और पेट की दीवार से पैदा होता है। यदि इसका इलाज न किया जाए तो ट्यूमर गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता था जिसमें संभावित तौर पर जानलेवा रक्तस्रताव भी शामिल था हालांकि डॉक्टरों ने ट्यूमर को सफलापूर्वक हटा दिया और अब महिला ठीक हो रही है।
बहुत कम और खतरनाक समस्या
सर्जरी के बाद मेडिकल टीम ने ट्यूमर की पहचान गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के तौर पर की जो कि कैंसर का एक दुर्लभ रुप है जो कि पेट की दीवार से पैदा होता है। यदि इसका इलाज न किया जाए तो यह कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है यहां तक कि इंटरनल ब्लीडिंग भी इसके कारण हो सकती है।

