मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का एक वायरल वीडियो प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक गर्भवती महिला, जिसके पति की हाल ही में मौत हो गई है, को अस्पताल के कर्मचारियों ने स्ट्रेचर साफ करने के लिए कहा। इस अमानवीय घटना के बाद संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।

क्या है पूरा मामला

डिंडौरी के गरदासरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला अपने पति को चिकित्सा सहायता के लिए लाई थी। दुर्भाग्यवश अस्पताल में ही उनके पति की मौत हो गई। इस दुखद क्षण में महिला अपने बच्चों के साथ गहरे सदमे में थी और रो रही थी। लेकिन इसी दौरान अस्पताल के कर्मचारियों ने उसके साथ असंवेदनशीलता का व्यवहार करते हुए उससे स्ट्रेचर साफ करने को कहा।

यह घटना तब चर्चा का विषय बन गई जब किसी ने इसका वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

प्रशासनिक कार्रवाई

मध्य प्रदेश के जनसंपर्क विभाग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने इस घटना के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। नर्सिंग अधिकारी राजकुमारी और आया छोटी बाई ठाकुर को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया है।

इसके साथ ही डॉ. चंद्रशेखर सिंह को आगामी आदेश तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करंजिया में अटैच किया गया है। विभाग ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और अस्पतालों में मानवता का ध्यान रखा जाना चाहिए।

आदेश में क्या लिखा?

डिंडोरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 31 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ दिख रहा है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गरदासरी में दिवंगत की पत्नी से अस्पताल का स्ट्रेचर साफ कराया गया। आदेश में यह भी कहा गया कि अस्पताल में साफ-सफाई के लिए आउटसोर्स व्यवस्था की गई थी, इसलिए ऐसे अमानवीय व्यवहार की कोई आवश्यकता नहीं थी।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि कर्मचारियों की ओर से कारण बताओ नोटिस का जवाब भी संतोषजनक नहीं था। इसके चलते कठोर कार्रवाई की गई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासन इस तरह की घटनाओं को लेकर गंभीर है।

समाज पर असर

यह घटना केवल डिंडौरी जिले के स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्था को उजागर नहीं करती, बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है। जब स्वास्थ्यकर्मी ऐसे संवेदनहीनता का परिचय देंगे, तो इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ेगा।

इस प्रकार की घटनाएं न केवल चिकित्सा सेवाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में एक गहरी छाप भी छोड़ती हैं। अस्पतालों में ऐसी स्थिति से बचने के लिए आवश्यक है कि कर्मचारियों को संवेदनशीलता और मानवता का पाठ पढ़ाया जाए।

By tnm

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