बिहार के स्वास्थ्य विभाग में लगातार लापरवाही और अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आती रही हैं। हाल ही में मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें एक निजी गार्ड मरीज का इलाज कर रहा है। यह मामला एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है और गंभीर सवाल उठाता है कि आखिरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल कौन कर रहा है।
गार्ड ने किया मरीज का इलाज
बिहार की अमंगलकारी व्यवस्था देखिए सरकारी अस्पताल में डॉक्टर और नर्स की जगह गार्ड इलाज कर रहा है। pic.twitter.com/uIDPTsiQbl
— RJD Muzaffarpur (@MuzaffarpurRjd) November 3, 2024
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि मुसहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के इमरजेंसी वार्ड में एक घायल मरीज को लाया गया है। लेकिन वहां न तो कोई डॉक्टर मौजूद है और न ही कोई मेडिकल स्टाफ। अस्पताल में तैनात एक निजी गार्ड ने मरीज के घाव को साफ
किया और फिर उसे इंजेक्शन लगाया। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस प्रकार स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण सुरक्षा कर्मी भी चिकित्सा सेवाओं में शामिल हो गए हैं।
वीडियो में गार्ड का यह व्यवहार स्पष्ट करता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में अव्यवस्था कितनी गहरी है। जब किसी आपात स्थिति में सही इलाज नहीं मिल पाता, तो इसका असर मरीज की जान पर भी पड़ सकता है। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए किसी ने चुपके से वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
इस वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। वीडियो की जानकारी जैसे ही स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मियों और अधिकारियों तक पहुंची, तो उनके होश उड़ गए। पीएचसी के प्रभारी से इस मामले की पूरी जानकारी मांगी गई है।
सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा कि उन्होंने पीएचसी मुसहरी के प्रभारी से जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा, यह मामला गंभीर है और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत
यह पहला मामला नहीं है जब बिहार के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की खबर आई है। अक्सर अस्पतालों में मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहता है। कभी मरीज जमीन पर पड़े होते हैं, तो कभी अस्पताल के बेड पर जानवर देखे जाते हैं। ऐसी स्थितियों ने मरीजों के जीवन को खतरे में डाल दिया है और यह बताता है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं कितनी कमजोर हो गई हैं।
मुसहरी पीएचसी के इस मामले ने एक बार फिर बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति को उजागर किया है। लोगों को अब यह सवाल उठाने का हक है कि आखिरकार वे किस पर भरोसा करें जब उनके स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले ही अनुपस्थित हैं।
