दीवाली का त्योहार भारत में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते प्रदूषण के चलते सरकार ने सामान्य पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बजाय केवल ग्रीन पटाखों को जलाने की अनुमति दी गई है। लेकिन अलवर में ग्रीन पटाखों के नाम पर प्रदूषण फैलाने वाले सामान्य पटाखों की बिक्री की जा रही है, जिससे पर्यावरण को खतरा हो रहा है। यह स्थिति गंभीर है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर क्षेत्र में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई है, जिसमें अलवर भी शामिल है।
ग्रीन पटाखे क्या हैं
ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इन्हें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा विकसित किया गया है और इनका निर्माण ऐसे रसायनों से किया गया है जो हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम करते हैं।
ग्रीन पटाखों की विशेषताएं
कम प्रदूषण
ग्रीन पटाखों से निकलने वाली हानिकारक गैसों, जैसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड, का उत्सर्जन सामान्य पटाखों की तुलना में 30-35% तक कम होता है।
कम धुआं और शोर
ये पटाखे कम धुआं उत्पन्न करते हैं, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है। साथ ही इनकी आवाज़ भी कम होती है, जिससे ध्वनि प्रदूषण में कमी आती है।
वायु गुणवत्ता में सुधार
ग्रीन पटाखों में ऐसे रसायनों का यूज किया जाता है जो हानिकारक धुएं को कम करते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता पर कम नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सामान्य पटाखों से ग्रीन पटाखों की तुलना
रासायनिक घटक
ग्रीन पटाखों में पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर की मात्रा कम होती है, जबकि सामान्य पटाखों में ये रसायन अधिक मात्रा में होते हैं।
प्रदूषण स्तर
ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में अधिक इको-फ्रेंडली होते हैं। इन्हें विशेष तकनीक से बनाया जाता है ताकि प्रदूषण कम हो सके।
ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ने के कारण
पर्यावरण की जागरूकता
लोग अब पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं और प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक उत्पादों की ओर रुझान बढ़ रहा है।
कानूनी नियम
कई राज्यों और शहरों में सामान्य पटाखों पर प्रतिबंध लग गया है। ऐसे में ग्रीन पटाखे एक बेहतर विकल्प बन गए हैं।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
लोग अपने और दूसरों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो गए हैं। ग्रीन पटाखों का उपयोग कर वे एक सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल दीवाली मनाने की कोशिश कर रहे हैं।
असली ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे करें
सर्टिफिकेट
ग्रीन पटाखों के पैकेट पर CSIR-NEERI (नेशनल एन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) का इको-फ्रेंडली सर्टिफिकेट होता है।
पैकेट पर मार्किंग
असली ग्रीन पटाखों के पैकेट पर QR कोड या ग्रीन मार्क होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि ये पटाखे पर्यावरण-अनुकूल हैं।
बाजार से खरीदते समय सावधानी
बाजार में नकली ग्रीन पटाखे भी उपलब्ध हो सकते हैं, इसलिए विश्वसनीय विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें और सर्टिफिकेट की जांच करें।
