भारत में त्योहारों का मौसम चल रहा है, और ऐसे समय में लोग अपने पसंदीदा व्यंजनों का आनंद लेना चाहते हैं। चाहे वह बाहर के होटल हों या ऑनलाइन फूड डिलीवरी, सभी का ध्यान स्वादिष्ट और रंगीन खाने पर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पसंदीदा खाने का रंग आर्टिफिशियल फूड कलर से भी हो सकता है? इन रंगों का इस्तेमाल आपकी सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है।
आर्टिफिशियल फूड कलर क्या हैं
आर्टिफिशियल फूड कलर जिसे फूड डाई के नाम से भी जाना जाता है, सिंथेटिक रंग होते हैं जो मुख्यतः केमिकल्स से तैयार किए जाते हैं। ये रंग खाद्य पदार्थों की रंगत और स्वाद को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इनमें कई हानिकारक तत्व भी होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं।
कहां-कहां होता है इस्तेमाल
आर्टिफिशियल फूड कलर का इस्तेमाल शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थों में किया जाता है। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने चिकन कबाब, मछली, और शाकाहारी खाद्य पदार्थों में इन रंगों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। इसके अलावा, चॉकलेट, च्युइंग गम, जेम्स, चिप्स, बेकरी उत्पादों (जैसे केक और कपकेक), पॉप्सिकल्स और कई तरह के सॉस में भी इनका प्रयोग होता है।
प्रमुख आर्टिफिशियल फूड कलर के नाम
रेड 40
एल्योर रेड या INS129
येलो 5
टार्दाजिन या INS102
येलो 6
सनसेट येलो या INS110
ब्लू 1
ब्रिलियंट ब्लू या INS133
ब्लू 2
इंडिगो कारमाइन या INS132
ग्रीन 3
फास्ट ग्रीन या INS143
एजोरूबिन
कार्मोइसिन या INS122
स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
आर्टिफिशियल फूड कलर में मौजूद हानिकारक रसायन कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, रेड 40, येलो 5 और येलो 6 जैसे रंगों में ऐसे तत्व होते हैं जो लंबे समय तक सेवन करने से एलर्जी, चकत्ते, सूजन, एक्जिमा और पित्ती जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा ब्लू 1 और ब्लू 2 जैसे रंग पाचन तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
बचाव के तरीके
रंग की पहचान
जब आप बाहर खाना खा रहे हों, तो अधिक चटकीले या कृत्रिम रंग के व्यंजन से सावधान रहें। सामान्यत: ज्यादा रंगीन खाने में आर्टिफिशियल फूड कलर का इस्तेमाल होता है।
पैकेज्ड फूड की जांच
पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर लेबल की जांच करें। पैकेट के पिछले हिस्से पर सामग्री की सूची होती है, जहां आप देख सकते हैं कि आर्टिफिशियल फूड कलर का प्रयोग किया गया है या नहीं।
सामग्री के बारे में पूछें
अगर आप किसी रेस्टोरेंट में हैं, तो आप सर्वर से यह पूछ सकते हैं कि उनके खाने में आर्टिफिशियल रंगों का इस्तेमाल हुआ है या नहीं।
घरेलू खाना बनाना
यदि संभव हो तो अपने खाने को घर पर बनाएं। इस तरह आप सामग्री की गुणवत्ता को नियंत्रित कर सकते हैं और सुरक्षित विकल्प चुन सकते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए हमेशा विशेषज्ञ से सलाह लें।
