हाल ही में साउथ कोरिया में लम्पी स्किन डिजिज (Lumpy Skin Disease – LSD) का एक नया मामला सामने आने के बाद से स्वास्थ्य अधिकारियों में चिंता बढ़ गई है। यह नया केस राजधानी सियोल से लगभग 147 किलोमीटर दूर एक फार्म में पाया गया है, जिससे देश में लम्पी स्किन डिजिज के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। दक्षिण कोरिया के कृषि, खाद्य एवं ग्रामीण मामलों के मंत्रालय ने इस मामले की पुष्टि की है और आवश्यक कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
6 फार्म्स को किया गया बंद
नए केस की जानकारी मिलने के तुरंत बाद, मंत्रालय ने उस फार्म के अलावा आसपास के 6 अन्य फार्म्स को भी 24 घंटों के लिए बंद करने का आदेश दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य लम्पी स्किन डिजिज के संभावित फैलाव को रोकना है। हाल ही में सियोल के निकट एक और फार्म पर भी एलएसडी के संदिग्ध मामले पाए गए थे। इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए, कृषि मंत्रालय ने सख्त सुरक्षा उपायों को लागू करने का निर्णय लिया है।
लम्पी स्किन डिजिज क्या है
लम्पी स्किन डिजिज एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से गाय, भैंस और अन्य पालतू जानवरों को प्रभावित करती है। यह बीमारी संक्रमित जानवरों के शरीर पर मच्छरों और अन्य रक्त चूसने वाले परजीवियों के माध्यम से फैलती है। खासकर उन जानवरों में यह अधिक पाया जाता है, जो बाहरी वातावरण में रहते हैं। इसके अलावा इंसान भी संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने पर इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
लक्षण और प्रभाव
जानवरों की त्वचा पर छोटे-छोटे गांठ या रैशेज बनना
तेज बुखार की समस्या होना
जानवरों की भूख में कमी होना और वजन कम होना
दूध उत्पादन में कमी आना
गंभीर मामलों में लम्पी स्किन डिजिज के कारण जानवरों की मृत्यु भी हो सकती है, जिससे पशुपालकों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक संकट बन सकता है।
प्रसार रोकने के उपाय
लम्पी स्किन डिजिज के प्रसार को रोकने के लिए दक्षिण कोरिया के कृषि मंत्रालय ने कई कदम उठाने का निर्णय लिया है। इनमें से एक महत्वपूर्ण कदम है जेनेटिक डायग्नोस्टिक किट का विकास, जो 2025 की शुरुआत में बाजार में उपलब्ध होगी। यह किट बीमारी के निदान में मदद करेगी और पशुपालकों को समय पर उपाय करने में सक्षम बनाएगी।
सरकारी प्रयास
दक्षिण कोरिया सरकार ने पिछले कुछ महीनों में इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें कृषि मंत्रालय द्वारा की गई निरीक्षण प्रक्रियाएं, संदिग्ध मामलों की पहचान, और संक्रमित जानवरों के उपचार के लिए उचित चिकित्सा प्रोटोकॉल शामिल हैं। इसके अलावा सरकार ने किसानों और पशुपालकों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए हैं, ताकि वे इस बीमारी के लक्षणों को पहचान सकें और समय पर आवश्यक कदम उठा सकें।
