मौसम ने रंग बदलना शुरु कर दिया है। जैसे ही हर साल मौसम बदलता है वैसे ही दिल्ली की फिजा भी बदलने लगती है। 19 अक्तूबर को धुंध की मोटी चादर ने राष्ट्रीय राजधानी को अपने काबू में कर लिया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) गिरकर 251 पर आ गया है जिसको खराब कैटेगरी में माना जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, सुबह सात बजे दिल्ली का एक्यूआई 273 दर्ज किया गया था जिसे सबसे खराब श्रेणी में रखा जाता है। बता दें कि सीपीसीबी ने बताया कि राजधानी में वायु प्रदूषण अगले तीन दिनों तक अपने चरम स्थिति पर रहेगा। सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी राष्ट्रीय राजधानी में इस समय ऐसा ही मंजर होता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी लगातार सरकार को निर्देश देता रहता है लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों के सामने हर साल एक ही सवाल होता है जाएं तो कहां जाएं।
क्यों होती है हवा जहरीली?
दिल्ली की जहरीली हवा का कारण है हरियाणा और पंजाब में किसानों की पराली जलाना। पराली जलाने से हवा में पीएम 2.5 का लेवल बढ़ता है। दिल्ली की हवा में यह जहर लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में इसके खतरनाक स्तर पर चले जाने की आशंका है। दिल्ली की एयर क्वालिटी पर नजर रखने वाले वॉर्निंग सिस्टम (Air Quality Early Warning System For Delhi) की भविष्यवाणी है कि 21 अक्तूबर से आगे दिल्ली की हवा और भी जहरीली होती जाएगी।

इन बातों का रखें ध्यान
एक्यूआई इंडेक्स 150 से ज्यादा होने पर फिजिकल एक्टिविटी वाली एक्सरसाइज, क्रिकेट, हॉकी, साइकलिंग, मैरोथॉन से परहेज ही करे। प्रदूषण स्तर के 200 से ज्यादा होने पर पार्क में भी दौड़ने और टहलने के लिए न जाएं। जब प्रदूषण का स्तर 300 से ज्यादा हो तो लंबी दूरी की वॉक भी न करें। जब स्तर 400 के पार हो तो घर के अंदर ही रहें, सामान्य वॉक भी न करें। घर के अंदर रहें, प्रदूषण स्तर 100 होने पर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालत होते हैं ऐसे में इस स्तर पर बिल्कुल भी घर से बाहर न निकलें और घर पर ही रहें।
पानी पिएं
सांसों से शरीर में पहुंचे जहल को बाहर निकालने के लिए पानी बेहद जरुरी है ऐसे में पानी पीना न भूलें। दिन में करीबन 4 लीटर पानी पिएं, घर से बाहर निकलते समय भी पानी पिएं। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैसें यदि ब्लड तक पहुंच जाएंगी तो कम नुकसान ही होगा।

