रेबीज एक ऐसी बीमारी है जो कुत्तों के काटने से फैलती है। हालांकि इसका अभी तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है। ऐसे में इसे लेकर लखनऊ के एक अस्पताल से अच्छी खबर सामने आ रही है। हाल ही में लोहिया अस्पताल में एंटी-रेबीज क्लिनिक की शुरुआत हो चुकी है जहां कुत्ते के काटने पूरा इलाज मिल सकेगा।
रेबीज से पीड़ित लोगों का इलाज हुआ संभव
लखनऊ के लोहिया अस्पताल के कमरा नंबर 32, ग्राउंड फ्लोर, हॉस्पिटल ब्लॉक में इसकी शुरुआत हुई है। बात दें कि Department of Community Medicine के अंतर्गत क्लिनिक जानवरों के काटने के पीड़ित लोगों को परामर्श, ओपीडी परामर्श, टीकाकरण की सेवा उपलब्ध कराया जाएगा।
क्या है यह बीमारी
एक्स्पर्ट्स के मुताबिक रेबीज एक ज़ूनोटिक बीमारी है। जो पूरी दुनिया में हर दिन हर 9 मिनट में रेबीज़ के की वजह से एक मौत होती है। वहीं एक्सपर्ट्स की माने तो किसी जानवर के काटने के बाद घाव को धोना, समय पर डॉक्टर से सलाह लेने और vaccination का पूरा कोर्स करना बेहद जरूर है।
क्या है इस इलाज का उद्देश्य
अस्पताल के सीएमएस प्रो. एके सिंह ने बताया कि एंटी-रेबीज क्लिनिक कुत्ते के काटने से होने वाली रेबीज से जान जाने वाले मामलों को कंट्रोल करना है। दरअसल हर साल लखनऊ में भी लगातार कुत्ते के काटने के मामले में काफी तेजी से इजाफा हो रहा है। ऐसे में लोगों को समझ नहीं आता कि उन्हें क्या करना चाहिए, एंटी रेबीज कहां लगवाना है, जिस वजह से उनके शरीर में इंफेक्शन फैल जाता है और कई लोगों को बचा पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन अब एंटी-रेबीज क्लिनिक की मदद से लोगों का इलाज काफी संभव हो गया है। इतना ही नहीं यह क्लीनिक लोगों को रेबीज के प्रति जागरूक भी करेगा।
कैसे होगा इलाज
एंटी रेबीज क्लिनिक में जानवर के काटने से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति को घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते पानी के नीचे साबुन से अच्छी तरह से धोना चाहिए और तुरंत vaccination कराना चाहिए। वहीं अगर कुत्ते के काटने के नए मामले सामने आते हैं तो उन्हें इंट्रामस्क्युलर इन्जेक्शन के 5 डोज 0,3,7,14 और अंतिम डोज 21-28 दिनों के बीच दी जानी चाहिए। अगर किसी जानवर ने गंभीर रूप से काट लिया है तो उसे vaccination के साथ इम्युनोग्लोबुलिन/एंटीबॉडी दी जाती है।
