आज जहां पूरी दुनिया में AI का डंका बजा हुआ है। उसे देखते हुए अब हेल्थ सेक्टर में भी इसको एहमियत दी जाएगी। बता दें इसकी भारत और जापान मिलकर काम करेंगे। दरअसल हाल ही में जेनेवा में विश्व स्वास्थ्य सभा का आयोजन हुआ जिसमे दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक संपन्न हुई। वहीँ इस दौरान साल 2018 में हस्ताक्षरित सहयोग ज्ञापन पर जल्द ही संयुक्त कार्य समूह आयोजित करने पर सहमति हुई है।
कई विषयों पर हुई बात

भारत की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा के मुताबिक डिजिटल स्वास्थ्य, स्वास्थ्य में एआई के उपयोग, बुजुर्गों की देखभाल, गैर संचारी रोगों में सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए जापान की हेल्प लेगा। इसके अलावा जापानी भाषा में नर्सिंग पेशेवरों के प्रशिक्षण पर चल रहे कार्यक्रम को मजबूत करने पर भी चर्चा होने के बाद सहमति जताई गयी। इसके अलावा इस सभा में विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से महामारी कोष का प्रस्ताव भी रखा गया जिस पर पिछले तीन साल से काम चल रहा था। इस पर डब्ल्यूएचओ की ओर से घोषणा की गयी है।
मॉरीशस के साथ भी समझौते
आपको बता दें जापान के अलावा भारत ने मॉरीशस के साथ मिलकर भी कई स्वास्थ्य समझौते किए हैं। मॉरीशस से मुलाकात के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने मॉरीशस में स्थापित जन औषधि केंद्र को पूर्ण रूप से कार्यात्मक बनाने के लिए प्रमाणन से संबंधित नियामक प्रक्रियाओं में तेजी लाने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मेडिकल छात्रों ने अपनी इंटर्नशिप पूरी कर ली है, उनकी परीक्षा आयोजित करने की सुविधा के लिए एनबीईएमएस के साथ समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण पर काम किया जाएगा।
भारतीयों को रोजगार मिलने की उम्मीद
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बैठक के दौरान मॉरीशस ने अपने देश में काम करने के इच्छुक स्वास्थ्य क्षेत्र के आईटी विशेषज्ञों की पहचान के लिए भारत से सहायता का हाथ माँगा है। इस प्रस्ताव पर भारत ने सहमति जताई और आगामी दिनों में इस प्रक्रिया के तहत देश के युवाओं को विदेशों में रोजगार के नए अवसर दिए जायेंगे। इसके अलावा डिजिटल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य कार्य बल की क्षमता निर्माण में भी भारत सहयोगी बन कर सामने आएगा।
