कोविड-19 के बाद जब भी किसी बीमारी के मामले बढ़ते हैं, तो समाज में चिंता और डर फैल जाता है। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है कि डिमेंशिया, विशेषकर अल्जाइमर रोग, तेजी से एक स्वास्थ्य संकट बन रहा है।
डिमेंशिया के मामलों में तेजी
ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के अनुसार, डिमेंशिया से संबंधित मौतों की दर में तेज वृद्धि हो रही है। वर्तमान में डिमेंशिया इस्केमिक हृदय रोग (ischemic heart disease) के बाद मृत्यु दर के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है। डिमेंशिया मस्तिष्क के कार्यों को प्रभावित करता है, जिससे स्मृति, सोचने की क्षमता और व्यवहार में बदलाव आते हैं।
बढ़ती उम्र और डिमेंशिया का खतरा
ऑस्ट्रेलिया में बढ़ती उम्र की जनसंख्या एक महत्वपूर्ण कारक है। जैसे-जैसे लोग लंबी उम्र तक जी रहे हैं, डिमेंशिया से प्रभावित होने की संभावना बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार इस समय डिमेंशिया के मामलों में 46% की वृद्धि हुई है, जो दवाओं की बढ़ती मांग का संकेत देती है।
दवाओं की बढ़ती मांग
ब्रेन से संबंधित बीमारियों के लिए नई दवाओं की आवश्यकता को देखते हुए, दवाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें न्यूरोप्रोटेक्टिव दवाएं और विभिन्न लक्षणों को नियंत्रित करने वाली दवाएं शामिल हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि डिमेंशिया और अल्जाइमर का कोई स्थायी इलाज नहीं है, और इन बीमारियों के इलाज की लागत भी काफी अधिक हो सकती है।
जन जागरूकता और स्वास्थ्य नीति
इस गंभीर स्थिति का सामना करने के लिए सरकारों और स्वास्थ्य अधिकारियों को कई कदम उठाने की आवश्यकता है। इनमें जन जागरूकता बढ़ाना, शोध में निवेश करना, और देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करना शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और नीति निर्माताओं को डिमेंशिया पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।
डिमेंशिया की रोकथाम
वृद्ध जनसंख्या के कारण डिमेंशिया के मामलों में वृद्धि को रोकने के लिए, प्राथमिकता स्वास्थ्य शिक्षा, नियमित स्वास्थ्य जांच और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जागरूकता बढ़ाने की होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त लोगों को जीवनशैली में बदलाव करने और स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण है।
