एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग अब एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की हाल ही में प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट 2023 ने इस मुद्दे को और स्पष्ट किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रोगाणु (बैक्टीरिया) लगातार एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर रहे हैं। इस स्थिति के कारण संक्रमणों का इलाज कठिन हो रहा है और इससे बीमारी फैलने और मृत्यु दर बढ़ने का जोखिम भी अधिक हो गया है।
प्रमुख रोगाणुओं में बढ़ रहा प्रतिरोध
रिपोर्ट में गहन चिकित्सा इकाइयों (ICU) में इलाजरत मरीजों में होने वाले संक्रमणों की विशेष रूप से चर्चा की गई है। अध्ययन में पाया गया है कि क्लेबसिएला निमोनिया और एसिनेटोबैक्टर बाउमानी, जो खून के संक्रमण (ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन) के लिए जिम्मेदार हैं, एंटीबायोटिक दवा इमिपेनेम के प्रति प्रतिरोधी हो गए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में सामान्य रूप से होने वाले संक्रमणों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रमुख दवाएं, जैसे कि ऑक्सासिलिन और वैनकोमाइसिन भी अब उतनी प्रभावी नहीं रह गई हैं। स्टैफिलोकोकस आरियस और एंटरोकोकस फेसियम क्रमशः इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी पाए गए हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
क्या कहती है ICMR की रिपोर्ट
ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, 39 अस्पतालों से एकत्र किए गए आंकड़ों में यह सामने आया कि खून, पेशाब की नली (UTI), और निमोनिया जैसे संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति रोगाणुओं में प्रतिरोध तेजी से बढ़ रहा है। ई. कोलाई और क्लेबसिएला निमोनिया जैसे बैक्टीरिया में कार्बापेनेम, फ्लोरोक्विनोलोन, और सेफलोस्पोरिन जैसी प्रभावी एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति उच्च प्रतिरोध देखा गया है। ये दवाएं अब इन रोगाणुओं को खत्म करने में उतनी सक्षम नहीं रह गई हैं, जिससे इलाज और अधिक जटिल हो गया है।
तेजी से फैल रहा प्रतिरोध
ICMR की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कामिनी वालिया, ने रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए कहा कि ICU, वार्ड और बाह्य रोगी विभाग (OPD) में रोगाणुओं द्वारा एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध का तेजी से बढ़ना एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। डॉ. वालिया ने कहा, एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक महत्वपूर्ण चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि इसके कारण संक्रमणों का इलाज जटिल और लंबा हो सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
समाधान की आवश्यकता
रिपोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया है कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित और अत्यधिक उपयोग ही प्रतिरोध का मुख्य कारण है। बिना चिकित्सीय सलाह के एंटीबायोटिक्स का उपयोग, या इलाज पूरा किए बिना दवाएं छोड़ देना, इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं। ICMR ने चिकित्सा संस्थानों और आम जनता से अपील की है कि वे एंटीबायोटिक्स का प्रयोग केवल चिकित्सीय परामर्श के बाद ही करें और दवाओं का दुरुपयोग न करें।
