डिप्रेशन एक मानसिक खतरा है। कोई भी इसका शिकार हो सकता है, चाहे फिर वे बच्चा हो या बुजुर्ग या युवा, ये किसी को भी नहीं छोड़ता। ये मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है। डिप्रेशन के लक्ष्णों के बारे में पता लगाना बहुत जरूरी है कि ये किस तरह शुरू होता है।
आपको बता दें कि एक अध्ययन से पता चला है कि स्मार्टफ़ोन के इस्तेमाल से इसके बारे में पता लगया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने दो स्मार्टफ़ोन ऐप की अवधारणा बनाई है जो जल्द ही आपके चेहरे और आँखों का विश्लेषण करके डिप्रेशन की पहचान करने में मदद करेगा।
ये आजकल की लाइफस्टाइल के चलते एक अग्रणी और अभूतपूर्व क्षण है। एआई का उपयोग करके मानसिक स्वास्थ्य का प्रारंभिक पता लगाने में ये एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। स्मार्टफोन को अवसाद का पता लगाने के लिए डायग्नोस्टिक इक्विपमेंट में बदलना प्रभावी और सुविधाजनक है। ये मानसिक स्वास्थ्य जांच और उपचार में एक कदम आगे है। इसका पता लगाने के लिए दो एआई-संचालित ऐप विकसित किए गए हैं।
आखों में होने वाले बदलावों के ज़रिए डिप्रेशन का पता लग सकता है। पता लगाने के लिए पुतली के आकार और आईरिस के बीच तुलना की जाती है। पिछले शोध ने भी डिप्रेशन एपिसोड के साथ प्यूपिलरी रिफ्लेक्स के जुड़ाव को दोहराया है। जब आप अपना फ़ोन खोलते या इस्तेमाल करते हैं, तो ऐप आपकी आँखों के 10 सेकंड के स्नैपशॉट को कैप्चर करके काम करता है।
प्यूपिलसेंस ऐप ने चार हफ़्तों में लगभग 16,000 इंटरैक्शन का मूल्यांकन किया। शुरुआत में ऐप के नतीजे उत्साहजनक थे क्योंकि ऐप ने 76% मामलों में डिप्रेशन एपिसोड की सटीक पहचान की।
