कार्डियक डिप्रेशन सुनकर हैरान न होएं। ये खास और कम सुनाई देने वाली बीमारी नहीं रही है। इसे हृदय अवसाद कहा जाता है।

Cardiac Depression

जिन लोगों को दिल की बीमारी हो या दिल की बीमारी का इलाज करवा रहे तो उन्हें होने वाला डिप्रेशन कार्डियक डिप्रेशन कहलाता है। जब ऐसे लोग चिंता, बेचैनी, उदासी आदि में घिर जाते हैं तो वो अवसाद का शिकार हो जाते हैं। जब वे इस चीज का शिकार होते हैं तो आस पास के लोगों से बातें करना कम कर देते हैं। उन्हें भूख कम लगती है और जब उनका हाल-चाल पूछा जाता है तो वे चिड़चिड़े हो जाते हैं।

Misconceptions about Cardiac Depression

इससे जूझ रहे मरीजों को इस बात की गलतफहमी हो जाती है कि वे थक गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता। वे मानने लग जाते हैं कि उनका जीवन खराब हो चुका है, वे आजाद नहीं हो पाएंगे इस नर्क से कभी। वे ज्यादा सोचते रहते हैं, जिससे कार्डियक डिप्रेशन को बढ़ावा मिलता है।

इस तरह करें बचाव

डॉक्टर का कहना है कि अगर दिल की बीमारी के रिस्क फैक्टर का पता लगाया जाए तो हाई बीपी, डायबिटीज और मोटापे को कंट्रोल किया जा सकता है। कंट्रोल करने से दिल से जुड़े रिस्क कम हो जाते हैं। साथ ही कार्डियक डिप्रेशन के मरीज को आस-पास पारिवारिक माहौल, इमोशनल सपोर्ट, सही डाइट और कंसलटेशन के जरिए ठीक किया जा सकता है। इससे मरीज में जिंदगी को लेकर कुछ गलत धारणाएं नहीं आएंगी और वे सकारात्मक रहेगा।

By tnm

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