पर्यावरण में लगातार बदलाव हो रहे हैं। इन बदलावों का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य पर हो रहा है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता की हानि और बढ़ते तापमान जैसी समस्याओं के चलते आने वाले समय में स्वास्थ्य को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हाल ही में हुए शोध और विशेषज्ञोंं की राय के अनुसार, यदि इन पर्यावरणीय बदलावों पर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में कई हेल्थ संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। आज विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है ऐसे में इस मौके पर आपको बताते हैं कि आने वाले समय में क्या-क्या हेल्थ संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।
दिल संबंधी दिक्कतें
बढ़ते तापमान और प्रदूषण का दिल पर नेगेटिव असर पड़ेगा। बहुत ज्यादा गर्मी ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक की संभावनाएं बढ़ेगी। फाइन पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) की अधिकता धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती है।
मेंटल हेल्थ पर भी पड़ेगा असर
ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर होगा। बहुत ज्यादा गर्मी से तनाव, डिप्रेशन और अनिद्रा जैसी समस्याएं बढ़ेगी। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ता हुआ खतरा मानसिक अस्थिरता और चिंता को भी जन्म देगा।
सांस संबंधी दिक्कतें
वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा से दमा, ब्रोंकाइटिस और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं। वाहनों, फैक्ट्रियों और पराली जलाने से निकलने वाले टॉक्सिक गैसों का असर सीधे फेफड़ों पर पड़ेगा। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में क्रोनिक रेस्पिरेटरी डिजीज का खतरा बढ़ेगा।

कुपोषण और फूड सेफ्टी की समस्या
जलवायु परिवर्तन से फसल उत्पादन में गिरावट आएगी जिससे कुपोषण बढ़ेगा। बहुत ज्यादा गर्मी और बाढ़ के कारण अन्न उत्पादन प्रभावित होगा। फूड इनसिक्योरिटी से पाचन तंत्र, हड्डियों और प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ेगा।
संक्रामक रोगों का बढ़ जाएगा खतरा
जलवायु परिवर्तन से डेंगू, मलेरिया और जीका वायरस जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ेगी। तापमान में वृद्धि से मच्छर और अन्य संक्रमित जीवों की संख्या बढ़ेगी। साफ पानी की कमी पानी जनित रोगों को जन्म देगी। पर्यावरणीय परिवर्तन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसे कंट्रोल करने के लिए हमें स्वच्छ ऊर्जा, हरे-भरे क्षेत्रों की रक्षा और प्रदूषण नियंत्रण जैसी पहल करनी होगी। अगर हम अभी सतर्क नहीं हुए, तो आने वाले समय में इन स्वास्थ्य समस्याओं से बचना मुश्किल हो सकता है।
