POTS को पोस्टुरल ऑर्थोस्टैटिक टैकीकार्डिया सिंड्रोम (Postural Orthostatic Tachycardia Syndrome) कहते हैं। आपको बता दें कि ये एक ऐसा मेडिकल कंडीशन है जिससे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम अफेक्ट होता है, जो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर जैसे इनवॉलंटरी फंक्शंस को रेगुलेट करता है। इसमें एक इंसान खड़े होने पर हार्ट रेट में तेजी से इजाफे का एहसास करता है। अक्सर चक्कर आना, हल्कापन, थकान, ब्रेन फॉग और बेहोशी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
ये किसी में भी हो सकता है, लेकिन खास तौर पर युवा महिलाओं में। फिलहाल इसका सटीक कारण अभी क्लियर नहीं है, लेकिन ये जेनेटिक्स, वायरल इंफेक्शंस या ऑटोइम्यून कंडीशंस से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में पीओटीएस को मैनेज और सेफ रहना लक्षणों को कम करने और लाइफ की क्वालिट में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाना शामिल है।
Hydration
आपको पता होना चाहिए कि डिहाइड्रेशन पीओटीएस के लक्षणों को बढ़ाता है। जिसके लिए आपको पानी ज्यादा पीना चाहिए जैसे कि दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर और ब्लड वॉल्यूम मेंटेन रखने के लिए इलेक्ट्रोलाइट रिच फ्लूइड।
Salt intake
हमेशा डॉक्टर की सलाह माने और शरीर में नमक की एक निश्नित मात्रा मेंटेन रखें। इससे ब्लड प्रेशर स्टेबलाइज होगा और चक्कर आने जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
Compression garments
आप कम्प्रेशन मोज़े या स्टॉकिंग्स पहनें ताकि ब्लड सर्कुलेशन में सुधार हो। इसकी मदद से खड़े होने पर पैरों में खून जमा होने से रुकेगा।
Exercise
आप साइकिल चलाना या तैराकी कर सकते हैं साथ ही लेटे हुए व्यायाम से मांसपेशियों को मजबूत करें। इससे लक्षणों को ट्रिगर किए बिना दिल की सेहत में सुधार लाया जा सकता है। अचानक पोजीशन बदलने से बचें, अगर जल्दी उठेंगे तो बेहोश हो सकते हैं।
डॉक्टर की सलाह
वैसे पीओटीएस के लक्षण अलग-अलग होते हैं, इसलिए जरूरी दवाओं या लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान अहम हैं। डॉक्टर के साथ सिम्पटम शेयर करते रहें। हद से ज्यादा गर्मी लगना, लंबे समय तक खड़े होना और भारी भोजन से बचें, इससे आपके लक्षण बढ़ सकते हैं। ऐसे में अगर बेहोशी महसूस हो रही है तो गिरने से बचने के लिए लेट जाएं या सिर नीचे करके बैठ जाएं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
