बहुत से लोग होते हैं जो बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही दवाइयां लेने लगते हैं और सोचते हैं कि सर्दी-जुकाम का वे खुद की इलाज कर लेंगे, लेकिन आपको ये भी पता होना चाहिए कि खुद से दवा लेने से अनचाहे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। भारत में अध्ययनों से पता चला है कि शहरी इलाकों में 37% लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवा ले लेते हैं।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस
इसका एक गंभीर नतीजा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के रूप में सामने आया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा की गई एक स्टडी के प्रारंभिक नतीजों के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाओं के बेहिसाब और बिना जरूरत के इस्तेमाल के कारण लगभग 50 % लोग अब उन मजबूत एंटीबायोटिक्स पर असर नहीं दिखा रहे हैं, जो आमतौर पर अस्पताल में होने वाले संक्रमणों के इलाज में दी जाती है।
खुद से दवाई लेने के साइड इफेक्ट्स
पेन किलर्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो उसका असर किडनी पर पड़ता है। गलत एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से संक्रमण और भी ज्यादा बढ़ सकता है। नींद की गोलियां या स्टेरॉयड के दुरुपयोग से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तब होता है जब बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं पर असर करना बंद कर देते हैं। ये समस्या गलत तरीके से और जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से बढ़ती है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ऐसे संक्रमण हो सकते हैं, जिन पर दवाएं काम नहीं करतीं, जिससे जीवनशैली पर गंभीर असर होता है।
पॉपुलर दवाओं का सच
पैरासिटामोल लोग बुखार में लेते हैं। ये सुरक्षित मानी जाती है, पर ज्यादा मात्रा में ली जाए तो लिवर को नुकसान होता है। एस्पिरिन, ये दवाएं सिरदर्द, बुखार, हल्के जुकाम और सूजन के लिए इस्तेमाल होती है। अगर ये दवाएं ज्यादा मात्रा में ली जाए या शराब के साथ ली जाएं तो लिवर को नुकसान होता है और पेट में अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
एंटी एलर्जी दवाएं
ये सर्दी, खांसी या एलर्जी में आराम देने वाली हैं, जैसे कि cetirizine। इन्हें ड्राइविंग से पहले न लें, क्योंकि सुस्ती आ सकती है। कुछ दवाओं में ऐसे तत्व हैं जो ब्लड प्रेशर बढ़ा देते हैं। इसलिए हाई बीपी वाले मरीजों को इन्हें सावधानी से लेना चाहिए।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
