पोलियो एक जानलेवा बीमारी है, जो पोलियोवायरस के कारण होती है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के मल से या दूषित पानी एवं भोजन से फैलता है। हालांकि, पोलियो का बड़ा खतरा यह है कि अधिकांश मामलों में लक्षण नज़र नहीं आते, जिससे यह दूसरों में फैल सकता है।
पाकिस्तान में पोलियो का खतरा बढ़ा
हाल ही में पाकिस्तान के 12 जिलों में पोलियो वायरस के मामले सामने आए हैं, जिससे भारत में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में दुनिया के लगभग 85% पोलियो मामले दर्ज होते हैं, और यह वायरस भारत की सीमा के पास लगातार फैलता है।
पोलियो क्या है और इसके खतरनाक प्रभाव
पोलियो वायरस मुख्य रूप से दूषित पानी और मल के संपर्क से फैलता है। यह बीमारी नॉन-पैरालिटिक पोलियो (हल्का पोलियो) और पैरालिटिक पोलियो (गंभीर पोलियो) के रूप में होती है। नॉन-पैरालिटिक पोलियो के लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, जबकि पैरालिटिक पोलियो से मांसपेशियों में कमजोरी और लकवा हो सकता है। गंभीर मामलों में यह मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
पोलियो से अधिक प्रभावित कौन होते हैं?
पोलियो के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील बच्चे होते हैं, खासकर वे बच्चे जो 5 वर्ष से कम आयु के होते हैं और जिन्हें पोलियो वैक्सीन की पूरी खुराक नहीं मिली होती है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग भी इस वायरस के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
भारत में पोलियो का अंत: एक बड़ी सफलता
भारत ने पोलियो के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ी और 27 मार्च 2014 को WHO ने भारत को पोलियो-मुक्त देश घोषित किया था। 2 अक्टूबर 1995 से पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई थी, जिसके बाद 2011 में भारत में पोलियो का आखिरी मामला सामने आया। यह एक बड़ी सफलता थी, जिसे दुनिया भर में सराहा गया।
पाकिस्तान के बढ़ते पोलियो मामलों से भारत में क्या खतरा है?
पाकिस्तान में पोलियो के बढ़ते मामलों से भारत को खतरा हो सकता है, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लगातार आवाजाही रहती है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान कई बच्चों को पोलियो की टीकाकरण खुराक नहीं दी गई थी, जिससे कुछ बच्चों में पोलियो के खिलाफ इम्यूनिटी नहीं विकसित हो पाई। इस स्थिति में इन बच्चों के पोलियो वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है।
क्या करें, क्या न करें?
टीकाकरण: बच्चों को पोलियो की पूरी खुराक दिलवाना सुनिश्चित करें।
स्वच्छता बनाए रखें: दूषित पानी और भोजन से बचें, खासकर पोलियो प्रभावित क्षेत्रों में।
स्वास्थ्य निगरानी: पोलियो के मामलों पर विशेष ध्यान रखें और नियमित निगरानी रखें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
