आजकल बालों का झड़ना एक आम समस्या बन चुकी है, और लोग इसके इलाज के लिए विभिन्न उपाय अपनाते हैं। हेयर ट्रांसप्लांट और हेयर एक्सटेंशन जैसे विकल्प अस्थायी समाधान हो सकते हैं, लेकिन क्या ये आपकी समस्या को जड़ से खत्म कर सकते हैं? नहीं, इसलिए आयुर्वेद में कुछ प्राकृतिक उपाय दिए गए हैं जो आपके बालों को फिर से उगाने में मदद कर सकते हैं।

डॉक्टर अलका की सलाह

आयुर्वेदिक डॉक्टर अलका विजयन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे कुछ बायोटिन रिच हर्ब्स को अपनी डाइट में शामिल करके बालों की ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बायोटिन सप्लीमेंट की जगह प्राकृतिक हर्ब्स का सेवन करना अधिक प्रभावी हो सकता है। आइए जानें, वो कौन सी जड़ी-बूटियां हैं जिनसे बालों को फिर से उगाने में मदद मिल सकती है।

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आंवला

आंवला विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत है और इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो बालों के फॉलिकल्स को मजबूत बनाते हैं और बालों का झड़ना रोकते हैं। डॉक्टर अलका ने आंवला के बारे में बताया कि जिनका पित्त प्रकृति है, उन्हें आंवला का मुरब्बा खाना चाहिए, जबकि कफ प्रकृति वाले लोग इसे शहद के साथ खाएं। यदि आपको अपने बॉडी टाइप के बारे में नहीं पता है, तो आंवला को स्टीम करके या पकाकर खाएं।

मोरिंगा लीफ

मोरिंगा में अमीनो एसिड प्रचुर मात्रा में होता है, जो बालों की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद करता है। यह कफ प्रकृति वाले लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। डॉक्टर अलका ने बताया कि मोरिंगा को चाय या काढ़े की तरह पिया जा सकता है। यह बायोटिन सप्लीमेंट का एक प्राकृतिक विकल्प हो सकता है।

शतावरी

शतावरी बालों के लिए लाभकारी हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी वात प्रकृति है। हालांकि डॉक्टर अलका ने सलाह दी है कि इसका सेवन किसी मेडिकल सुपरवाइजर के मार्गदर्शन में ही करें। शतावरी स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है, जिससे बालों का विकास तेजी से होता है।

तिल के बीज

तिल के बीज भी बालों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। डॉक्टर अलका का कहना है कि यह वात और कफ प्रकृति वाले लोगों के लिए अच्छा है। तिल में जिंक और मैग्नीशियम होते हैं, जो बालों के झड़ने को रोकने, ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने और बालों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

भृंगराज के पत्ते

भृंगराज बालों के लिए एक गुणकारी जड़ी-बूटी है। इसमें एंटीफंगल प्रॉपर्टीज होती हैं जो रूसी और स्कैल्प पर खुजली को कम करती हैं। डॉक्टर अलका ने बताया कि जिनका पित्त प्रकृति है, वे इसे घी में भूनकर अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

कृपया ध्यान दें

जब आपके पास प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपाय मौजूद हों, तो केमिकल से भरे उत्पादों का उपयोग क्यों करें? यदि आप अपने बालों को स्वस्थ बनाना चाहते हैं, तो डॉक्टर अलका द्वारा बताए गए इन हर्ब्स को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें और बालों की सेहत को प्राकृतिक तरीके से सुधारें।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

By tnm

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