इंटरनेट पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि हेपेटाइटिस डी (एचडीवी) सिर्फ उन्हीं लोगों को होता है, जिन्होंने पहले हेपेटाइटिस बी (एचबीवी) का शिकार किया हो। इस दावे ने कई लोगों को चिंता में डाल दिया है, लेकिन क्या यह सच है? सजग फैक्ट चेक टीम ने इस दावे की जांच की है, और अब हम आपको इस बारे में सही जानकारी देंगे।
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क्या हेपेटाइटिस डी सिर्फ हेपेटाइटिस बी के मरीजों को होता है?
यह दावा सही है कि हेपेटाइटिस डी (एचडीवी) सिर्फ उन्हीं लोगों को प्रभावित करता है जिनका पहले से हेपेटाइटिस बी (एचबीवी) संक्रमण हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस डी एक डिपेंडेंट वायरस है, जिसका मतलब है कि यह वायरस सिर्फ तब सक्रिय हो सकता है जब शरीर में पहले से हेपेटाइटिस बी वायरस मौजूद हो। हेपेटाइटिस बी संक्रमित लीवर में पाया जाता है, और हेपेटाइटिस डी वायरस इस पर निर्भर करता है।
नवी मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल की गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और हेपाटोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. सोनाली गौतम ने इस तथ्य की पुष्टि की है। उनका कहना है कि हेपेटाइटिस डी (डेल्टा हेपेटाइटिस) वायरस तब तक नहीं फैल सकता जब तक कि हेपेटाइटिस बी वायरस का संक्रमण न हो।
हेपेटाइटिस डी का खतरा
हेपेटाइटिस डी एक गंभीर संक्रमण है, जो लीवर को बुरी तरह प्रभावित करता है। जब एचबीवी और एचडीवी दोनों एक साथ लीवर को संक्रमित करते हैं, तो यह लीवर के लिए अत्यधिक खतरनाक हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप सिरोसिस (लीवर का क्षय) और लीवर फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो जीवन के लिए खतरे का कारण बन सकती हैं।
हेपेटाइटिस बी का वैक्सीनेशन और सुरक्षा
अगर आपने हेपेटाइटिस बी के लिए वैक्सीनेशन लिया हुआ है, तो आपको हेपेटाइटिस डी से सुरक्षा मिल सकती है। क्योंकि हेपेटाइटिस डी, हेपेटाइटिस बी वायरस पर निर्भर करता है, इसलिए एचबीवी के लिए वैक्सीनेशन लेने से एचडीवी के संक्रमण से भी बचाव होता है। हेपेटाइटिस बी का नियंत्रण और उसका इलाज एचडीवी के संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
