अमेरिका में बर्थराइट सिटीजनशिप के संदर्भ में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद कुछ भारतीय जोड़े प्रीटर्म डिलीवरी का विकल्प चुन रहे हैं। उनका उद्देश्य 20 फरवरी तक अपने बच्चे को जन्म देने के लिए है ताकि वह अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर सके। हालांकि डॉक्टरों ने प्रीटर्म डिलीवरी के स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में चेतावनी दी है, विशेषकर सी-सेक्शन की स्थिति में।
बर्थराइट सिटीजनशिप: 20 फरवरी की डेडलाइन
कुछ भारतीय जोड़े जो अमेरिका में रहकर काम कर रहे हैं, ने अपनी गर्भवती पत्नियों को जल्दी प्रसव के लिए प्रेरित किया है। उनका उद्देश्य अपने नवजात शिशु को अमेरिकी नागरिकता दिलवाना है, क्योंकि 20 फरवरी को ट्रंप प्रशासन के द्वारा लागू की गई संभावित नीति के अनुसार बर्थराइट सिटीजनशिप प्राप्त करने के लिए जन्म तिथि एक महत्वपूर्ण कारक बन सकती है। हालांकि इस मुद्दे पर एक फेडरल जज ने ट्रंप के आदेश को असंवैधानिक बताते हुए उसे अस्थायी रूप से रोक दिया है।
प्रीटर्म डिलीवरी के जोखिम
डॉक्टरों का कहना है कि प्रीटर्म डिलीवरी यानी गर्भावस्था की 37 सप्ताह से पहले प्रसव, कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि इससे बच्चों के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
बच्चों के लिए संभावित खतरे
फर्टिलिटी विशेषज्ञ के मुताबिक प्रीटर्म डिलीवरी से बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते, जो श्वसन संकट का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा बच्चों को संक्रमण, फीडिंग समस्याएं और दीर्घकालिक न्यूरोविकास संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए डॉक्टरों का सुझाव है कि प्रीटर्म डिलीवरी से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
माताओं के लिए जोखिम
प्रीटर्म डिलीवरी से माताओं को भी कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक यह प्रसव के बाद संक्रमण, मानसिक तनाव और पोस्टपार्टम जटिलताओं को जन्म दे सकता है। यदि सी-सेक्शन की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो माताओं को रिकवरी में अधिक समय लग सकता है। इसके अतिरिक्त गर्भधारण के दौरान भविष्य में गर्भाशय के फटने (यूटेरिन रप्चर) का खतरा भी बढ़ सकता है।
सी-सेक्शन के जोखिम
एक्सपर्ट्स ने प्रीटर्म डिलीवरी के दौरान सी-सेक्शन के जोखिमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के बाद संक्रमण, रक्तस्राव और दीर्घकालिक रिकवरी के मुद्दे उत्पन्न हो सकते हैं। इसके अलावा सी-सेक्शन के बाद भविष्य में गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।
प्राकृतिक जन्म को बढ़ावा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्राकृतिक जन्म की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं। सही प्रीनेटल देखभाल और संतुलित जीवनशैली से प्रीटर्म डिलीवरी के जोखिमों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा उन्हें यह भी कहना था कि मां को प्रीटर्म लेबर के संकेतों के बारे में जागरूक करना और प्रीनेटल केयर का महत्व समझाना जरूरी है।
विशेषज्ञों के सुझाव
डॉक्टरों का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान नियमित प्रीनेटल चेकअप्स और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ गर्भावस्था सुनिश्चित हो सकती है। इसके अलावा मां के पोषण और मानसिक तनाव प्रबंधन पर ध्यान देने से भी डिलीवरी के समय जोखिम कम हो सकते हैं।
