हाल ही में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका मानना है कि अगले 26 वर्षों में यानी 2050 तक, डेंगू के मामलों में 40 से 60 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। यह चिंता इसलिए है क्योंकि बढ़ता तापमान और बदलते मौसम मच्छरों के प्रसार में योगदान दे रहे हैं, जो डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार का कारण बनते हैं। इन बीमारियों का खतरा अब उन इलाकों में भी बढ़ सकता है जहां ये पहले नहीं पाई जाती थीं।

डेंगू के मामलों में वृद्धि और इसके कारण

डेंगू बुखार जो एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है, अब एक वैश्विक चिंता बन चुका है। वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के चलते तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे मच्छरों का प्रसार तेजी से हो रहा है। हालिया अध्ययन में यह सामने आया है कि तापमान में 15 डिग्री सेल्सियस से 27.8 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि के दौरान डेंगू के मामले बढ़ते हैं। हालांकि अत्यधिक गर्मी होने पर डेंगू का प्रसार धीमा पड़ सकता है।

अमेरिकन सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन का अध्ययन

अमेरिकन सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन (एएसटीएमएच) की वार्षिक बैठक में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को डेंगू के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण बताया। यह अध्ययन प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और मैरीलैंड के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था। वैज्ञानिकों ने 21 देशों में लगभग 15 लाख डेंगू मामलों का विश्लेषण किया और यह निष्कर्ष निकाला कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं।

उत्सर्जन में कमी से हो सकता है असर

वैज्ञानिकों ने यह भी पुष्टि की है कि यदि उत्सर्जन को सीमित किया जाए, तो बढ़ते तापमान के कारण डेंगू के मामलों में वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को अनदेखा किया गया, तो डेंगू के मामलों में और तेजी से वृद्धि हो सकती है।

भारत में डेंगू के बढ़ते मामले

भारत में भी डेंगू के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हो रही है। पिछले पांच वर्षों में डेंगू के मामलों में 84 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2023 में डेंगू के 289,235 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2018 में यह संख्या 157,315 थी। यही नहीं इस दौरान डेंगू से होने वाली मौतों में भी 192 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। डेंगू के कारण होने वाली गंभीर जटिलताओं में रक्तस्राव और सदमे जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं।

अमेरिका में भी बढ़े डेंगू के मामले

अमेरिका में भी डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं। 2023 में डेंगू के 45.9 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे, और 2024 में यह संख्या बढ़कर 1.25 करोड़ तक पहुंच गई है। कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा जैसे स्थानों पर भी डेंगू के स्थानीय मामले दर्ज किए गए, जो इस बात का संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण डेंगू जैसे मामलों का प्रसार अब नए क्षेत्रों में हो रहा है।

डेंगू का इलाज और टीके

डेंगू का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन इसके दो टीके उपलब्ध हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि हालांकि डेंगू के कुछ हल्के लक्षण होते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में जोड़ों में दर्द, रक्तस्राव और शॉक जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डेंगू को “हड्डी तोड़ बुखार” भी कहा जाता है।

जलवायु परिवर्तन और डेंगू के मामलों में वृद्धि

अध्ययन से यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन डेंगू के मामलों के बढ़ने के लिए जिम्मेदार है और भविष्य में इस वृद्धि को कम करने के लिए जरूरी है कि उत्सर्जन में कटौती की जाए। यदि उत्सर्जन को नियंत्रित किया जाता है, तो 2050 तक डेंगू के मामलों में होने वाली 60 फीसदी की वृद्धि को 40 फीसदी तक सीमित किया जा सकता है।

भविष्य में जलवायु परिवर्तन का असर

हालांकि उत्सर्जन में बड़ी कटौती के बावजूद, जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते 17 देशों में डेंगू के मामलों में और वृद्धि हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को लेकर अधिक सतर्क और तैयार रहने की जरूरत है।

By tnm

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