एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस, परजीवी और अन्य रोगजनक एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी हो जाते हैं, जिससे इन दवाओं का प्रभावी उपचार करना मुश्किल हो जाता है। AMR एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन गई है और यह भविष्य में और भी गंभीर हो सकती है। हाल ही में एक लांसेट अध्ययन में 1990 से 2021 तक एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से होने वाली मौतों का अनुमान एक मिलियन से अधिक था, और 2021 में अकेले 4.71 मिलियन मौतें AMR से संबंधित थीं। अगर इसे नियंत्रण में नहीं किया गया, तो 2050 तक यह संख्या बढ़कर 8.22 मिलियन हो सकती है।

AMR का वैश्विक आर्थिक असर

AMR से न केवल स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि इसका आर्थिक प्रभाव भी गंभीर है। इलाज की लागत बढ़ जाती है, और इलाज में कठिनाइयां आती हैं। वहीं 2050 तक वैश्विक स्वास्थ्य लागत में $1 ट्रिलियन का इजाफा हो सकता है। इसके अलावा उत्पादकता में कमी और मृत्यु के कारण 2030 तक वैश्विक GDP में $3.4 ट्रिलियन की हानि हो सकती है। यह एक ऐसी समस्या है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भारत में AMR पर कार्य

भारत ने AMR के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2010 में राष्ट्रीय AMR टास्क फोर्स की स्थापना की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय नीति और कार्यक्रम लागू हुए। 2017-2021 तक NAP-AMR योजना ने AMR से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। हाल ही में NAP-AMR 2.0 (2022) लॉन्च किया गया, जिसमें “One Health” दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

पर्यावरण में एंटीमाइक्रोबियल्स का फैलाव

AMR का प्रमुख कारण पर्यावरण में एंटीमाइक्रोबियल्स का फैलाव है, जो जल, मिट्टी और वायु में एंटीमाइक्रोबियल्स के अवशेष छोड़ते हैं। अस्पतालों, फार्मास्युटिकल उद्योगों और घरेलू अपशिष्ट जल से एंटीमाइक्रोबियल्स का रिसाव AMR के प्रसार में योगदान करता है। भारत जैसे विकासशील देशों में अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों (ETPs और STPs) की सीमाएं हैं, जो इन प्रदूषकों को पूरी तरह से हटाने में सक्षम नहीं होते।

समाधान के रूप में नई तकनीकें

हाल के वर्षों में नई और सस्ती तकनीकों की आवश्यकता को महसूस किया गया है जो जल में एंटीमाइक्रोबियल्स को प्रभावी ढंग से हटाएं और पर्यावरण में उनके फैलाव को रोके। फाउंडेशन फॉर नेग्लेक्टेड डिजीज रिसर्च (FNDR)ने एक नई, किफायती, पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ फ़िल्ट्रेशन तकनीक विकसित की है, जो wastewater से एंटीमाइक्रोबियल्स, अन्य APIs (active pharmaceutical ingredients), और सूक्ष्मजीवों को हटा सकती है। यह तकनीक मौजूदा ETPs और STPs में अतिरिक्त ऊर्जा खपत के बिना लागू की जा सकती है और जल को सुरक्षित पर्यावरणीय रिलीज के लिए उपचारित कर सकती है।

FNDR तकनीक की क्षमता

FNDR की तकनीक विभिन्न प्रकार के एंटीमाइक्रोबियल्स जैसे एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल्स, एंटीवायरल्स, एंटिमाइकोबैक्टीरियल्स, और एंटिमलेरिया को प्रभावी रूप से हटा सकती है। इसके साथ ही, यह E. coli, Enterococcus faecalis, SARS-CoV-2 जैसे पैथोजेन्स और भारी धातुएं, फ्लोराइड, और औद्योगिक रंगद्रव्य जैसी जल प्रदूषकों को भी हटा सकती है। लैब-स्केल परीक्षणों के परिणाम बताते हैं कि इस तकनीक का प्रभाव 70-90% एंटीमाइक्रोबियल्स को हटाने में सफल रहा है।

प्रारंभिक परीक्षण और भविष्य की संभावनाएं

FNDR की तकनीक ने अस्पतालों में फील्ड परीक्षणों में भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें 70-90% एंटीमाइक्रोबियल्स का उन्मूलन देखा गया। इसका बड़ा पैमाने पर उपयोग किए जाने पर AMR से संबंधित रोगजनक मृत्यु दर, रोग और वैश्विक सामाजिक-आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।

आवश्यकता: नई तकनीकों की त्वरित तैनाती

समस्या को प्रभावी तरीके से हल करने के लिए FNDR जैसी नई तकनीकों को त्वरित रूप से लागू किया जाना चाहिए। सरकारों और वैश्विक नीति फ्रेमवर्क्स को इन तकनीकों को अपनाने और एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय एक्शन प्लान में शामिल करने की आवश्यकता है। यदि हम अब कार्रवाई नहीं करते, तो AMR एक बड़ी वैश्विक चुनौती बन सकती है, जिसका सामना करना कठिन होगा।

By tnm

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