बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका और ‘स्वर कोकिला’ के नाम से मशहूर शारदा सिन्हा की हालत इन दिनों गंभीर बनी हुई है। उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया है। सोमवार शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, और मंगलवार को भी उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमन सिन्हा ने खुद इस खबर की पुष्टि की और अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से बताया कि यह सच्ची खबर है कि उनकी मां वेंटिलेटर पर हैं।
72 वर्षीय शारदा सिन्हा की तबीयत को लेकर उनके परिवार और उनके चाहने वालों में गहरी चिंता का माहौल है। शारदा सिन्हा ने भारतीय संगीत जगत में अपनी अद्वितीय पहचान बनाई है और खासकर छठ पूजा के गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके गाए गए गीतों ने बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमन सिन्हा ने इस कठिन समय में अपने प्रशंसकों और शुभचिंतकों से दुआओं की अपील की है।
पीएम मोदी ने लिया हालचाल
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शारदा सिन्हा की तबीयत के बारे में उनके बेटे अंशुमन सिन्हा से फोन पर बात की और उनकी मां के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने अंशुमन से कहा, “आप लोग मजबूती से इलाज कराएं और हम सभी की प्रार्थनाएं आपके साथ हैं।” इसके जवाब में अंशुमन सिन्हा ने कहा, “हमारी मां को दुआओं की बहुत जरूरत है, वह बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रही हैं और इस बार स्थिति काफी कठिन है।” अंशुमन ने आगे कहा, “हमारा बस यही प्रयास है कि मां लड़े और इस मुश्किल से बाहर निकलें।”
दुआओं की जरुरत है
अंशुमन सिन्हा की आवाज में दुख और उम्मीद का मिला-जुला एहसास था। वह काफी भावुक होते हुए कहते हैं, “मां काफी कठिन स्थिति से गुजर रही हैं और इस समय उन्हें हमारी प्रार्थनाओं की जरूरत है। डॉक्टरों से मिलकर आए हैं, और उन्होंने बताया कि मां की हालत गंभीर है, लेकिन हम सब उनसे उम्मीद नहीं छोड़ सकते।”
शारदा सिन्हा का संगीत से गहरा रिश्ता रहा है। उनके गाने विशेष रूप से छठ पूजा के गीत, जैसे ‘दुखवा मिटाईं छठी मईया’, बहुत लोकप्रिय हुए हैं। उनका संगीत बिहार और उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्वीकार किया जाता है। उनका संगीत, खासकर उनकी भावनात्मक आवाज, हर दिल को छू जाता है।
संगीत में योगदान
शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था, एक ऐसे परिवार में जहां संगीत की महिमा थी। उन्होंने 1980 में अपने करियर की शुरुआत की, जब उन्हें ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के जरिए संगीत क्षेत्र में पहचान मिली। उनकी आवाज ने न सिर्फ छठ गीतों को लोकप्रिय बनाया, बल्कि उन्होंने मैथिली, भोजपुरी और हिंदी में भी कई गाने गाए, जिनका आज भी लोग आनंद लेते हैं।
उनके संगीत में समर्पण और भावनाओं की गहरी झलक मिलती है। उनके द्वारा गाए गए विवाह गीत, छठ गीत, और पारंपरिक गाने आज भी श्रोताओं के दिलों में बसते हैं। शारदा सिन्हा के योगदान को देखते हुए उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।
