हाल ही में अमेरिका में अमेरिकन मलेरिया के नाम से जानी जाने वाली बबेसिओसिस बीमारी का खतरा फिर से बढ़ सकता है। ओपन फोरम इन्फेक्शियस डिजीज पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, 2015 से 2022 के बीच अमेरिका में बबेसिओसिस के मामलों में 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इस तेजी से बढ़ते मामलों ने विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह न केवल टिक-जनित रोग है, बल्कि इसके लक्षण लाइम रोग जैसी अन्य बीमारियों से भी मिलते-जुलते हैं। इससे बीमारी का सही निदान और उपचार चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बबेसिओसिस क्या है
बबेसिओसिस एक परजीवी रोग है, जो बेबेजिया नामक परजीवी द्वारा फैलता है। यह परजीवी Ixodes प्रजाति के टिक (जैसे black-legged tick या deer tick) के काटने से इंसानों में प्रवेश करता है। इस बीमारी का असर मुख्य रूप से लाल रक्त कोशिकाओं पर पड़ता है और इसका परिणाम एनीमिया (रक्त की कमी) हो सकता है। यही वजह है कि इसे अमेरिकन मलेरिया कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण मलेरिया से काफी मिलते-जुलते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि बबेसिओसिस के मामलों में वृद्धि का कारण बदलते पर्यावरणीय और सामाजिक कारक हैं। जैसे-जैसे मौसम गर्म हो रहा है, टिकों की संख्या में वृद्धि हो रही है। साथ ही, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मनुष्यों और जानवरों के बीच संपर्क बढ़ने से टिक-जनित बीमारियों का फैलाव भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो यह बीमारी अमेरिका के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
क्या है इसक लक्षण
बबेसिओसिस के लक्षण मलेरिया के लक्षणों से काफी समान होते हैं। यही कारण है कि इसे अमेरिकन मलेरिया कहा जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
तेज बुखार होना
अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना
पूरे शरीर में विशेषकर मांसपेशियों में दर्द होना
हल्का या गंभीर सिरदर्द होना
बुखार के साथ अत्यधिक पसीना आना
एनीमिया की समस्या होना
उपचार और रोकथाम
बबेसिओसिस का इलाज समय पर न किया जाए तो यह घातक हो सकता है, खासकर कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों के लिए। इसके इलाज के लिए एंटी माइक्रोबियल दवाओं का उपयोग किया जाता है, जैसे आर्टीमिसिनिन और क्लिंडामाइसिन। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है, जहां रक्त संक्रमण और अंगों की स्थिति पर निगरानी की जाती है। हालांकि, शुरुआती लक्षणों की पहचान होने पर उपचार सरल और प्रभावी हो सकता है।
रोकथाम के लिए टिक-प्रूफ उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है। जंगलों या घास वाले इलाकों में जाने पर लंबे कपड़े पहनें और टिक-रोधी स्प्रे का उपयोग करें। शरीर की नियमित जांच करें और अगर टिक मिला तो उसे तुरंत हटा दें।
जागरूकता का महत्व
बबेसिओसिस जैसी बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। इस बीमारी और इसके लक्षणों के बारे में जानकारी होना समय पर इलाज और रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है। टिक-जनित रोगों का प्रसार बढ़ रहा है, और बबेसिओसिस का अमेरिका में बढ़ता खतरा इसका ताजा उदाहरण है। एक्सपर्ट्स के अनुसार जल्द से जल्द कार्रवाई करना और बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, ताकि इसे एक बड़े स्वास्थ्य संकट में बदलने से रोका जा सके।
