जब बच्चा पैदा होता है तो उसके दूध के दांत होते हैं, जिसके बाद दूध के दांत टूटते हैं और असली में दांत आते हैं। जब बच्चों के दांत गिरते हैं तो नए आ जाते हैं, ताकि उनके दांत स्ट्रोंग हो जाएं। कुछ सालों बाद दांत गिरने बंद हो जाते हैं और एक उम्र तक दांत उगने भी बंद हो जाते हैं।
अब मान लीजिए कि आपके 20, 25 या 30 साल की उम्र में किसी वजह से दांत टूट जाते हैं तो टेंशन की बात नहीं है। अब बचपन के दूध की दांत की तरह ही इसे भी उगाना काफी आसान होगा। आपको बता दें कि जापान की एक स्टार्टअप का दावा है कि उन्होंने दांत उगाने वाली दवा बना ली है। सब कुछ सही रहा तो 2030 तक यह दवा मार्केट में भी आ जाएगी। ऐसा होने पर आप कई प्रॉब्लम से बच पाएंगे।
दवा का Trial
जानकारी के अनुसार, दांतों को दोबारा उगाने वाली दवा फिलहाल ह्यूमन ट्रायल फेज में है। अभी तक इस ड्रग का ट्रायल चूहों पर हुआ है, जिसके रिजल्ट चौंकाने वाले आए हैं। स्टार्टअप का टारगेट है कि साल 2030 तक दांत उगाने वाली दवा बाजार में आ सके। उनके लिए ये बहुत फायदेमंद होगा, जिनके कुछ दांत जन्म से ही गायब होते हैं यानी वे कॉनजेनिटल एनोडोंटिया के शिकार हों। ये दवा उस प्रोटीन को टारगेट करती है, जो दांतों की ग्रोथ को रोकती है।
इसकी कीमत
फिलहाल इसका सेफ्टी चेक का पहला फेज काफी अच्छा रहा है। 2025 में इसका स्टेज 2 ट्रायल भी शुरू हो जाएगा। दवा के असर का आंकलन किया जाएगा। इस दवा को जन्मजात एनोडोंटिया वाले 2 से 7 साल के मरीजों को दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि इस दवा की कीमत 1.5 मिलियन येन यानी करीब लाख रुपए हो सकती है। इसे हेल्थ इंश्योरेंस में भी कवर किया जा सकेगा।
