मंकीपॉक्स (Mpox) अब वैश्विक स्तर पर एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है, और इसका असर भारत में भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में भारत में मंकीपॉक्स के दो नए मामले दर्ज हुए हैं, जो कि केरल और हरियाणा में पाए गए। 17 सितंबर को केरल के मलप्पुरम जिले में एक व्यक्ति, जो UAE से लौटा था, को मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद क्वारंटीन किया गया। इससे पहले 9 सितंबर को हरियाणा के हिसार से दिल्ली लौटे एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई थी। इन मामलों ने भारत में मंकीपॉक्स के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मंकीपॉक्स का वैश्विक खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 14 अगस्त को मंकीपॉक्स को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था। अब तक इस बीमारी ने दुनिया भर में कई देशों को प्रभावित किया है। 2024 में अब तक मंकीपॉक्स के 15,600 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 537 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में 2022 के बाद से अब तक मंकीपॉक्स के कुल 30 मामले सामने आ चुके हैं। इस महामारी के फैलने का एक बड़ा कारण यात्रा है, और यही कारण है कि भारतीयों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी मंकीपॉक्स के फैलने के बाद एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लोगों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
मंकीपॉक्स का हॉटस्पॉट देश
मंकीपॉक्स के फैलने का मुख्य केंद्र अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) है। यह वायरस सबसे पहले कांगो से ही दुनिया के अन्य हिस्सों में फैला। हालांकि अब यह बीमारी कई अन्य देशों में भी तेजी से फैल रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
मंकीपॉक्स वैक्सीनेशन की कारगरता
मंकीपॉक्स के खिलाफ वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन यह अभी भी सीमित देशों तक ही पहुंच पाई है। सबसे पहले नाइजीरिया में इसकी वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है, लेकिन बाकी देशों में इसे लागू करने में अभी भी समय लग सकता है। मंकीपॉक्स का सबसे पहला मामला 1958 में डेनमार्क में पाया गया था, और इंसानों में इसका पहला केस 1970 में रिपोर्ट किया गया था। वर्तमान में मंकीपॉक्स का जो स्ट्रेन (क्लैड-1b) फैला है, वह पहले वाले स्ट्रेन से भी ज्यादा खतरनाक है। पहले स्ट्रेन के फैलने का प्रमुख कारण शारीरिक संबंध था, जबकि दूसरे स्ट्रेन का फैलाव यात्रा के जरिए हो रहा है।
हालांकि वैक्सीनेशन इस बीमारी के खिलाफ कारगर साबित हो रहा है, लेकिन इसे पूरी तरह से जड़ से खत्म करने के लिए वैश्विक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
