‘एंजियोग्राफी इन डेथ इन्वेस्टिगेशन एंड मैनेजमेंट ऑफ स्नेक बाइट (‘Death To Diagnosis: PM-CT Angiography In Death Investigation And Management Of Snake Bite’) नाम का एक हाइब्रिड सीएमई सत्र आयोजित किया। एम्स बठिंडा के कार्यकारी निदेशक डॉ. डी.के. सिंह के मार्गदर्शन में सीएमई ऑनलाइन और भौतिक दोनों प्रारूपों में आयोजित की गई थी। डॉ. अखिलेश पाठक डीन एम्स बठिंडा ने इसका आयोजन किया। सीएमई का प्राथमिक उद्देश्य फोरेंसिक अभ्यास में हाल की प्रगति के बारे में चिकित्सा समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाना था।
260 चिकित्सा पेशेवरों ने लिया भाग
मुख्य वक्ताओं ने विभिन्न विषयों पर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। एम्स बठिंडा के डॉ. भूपिंदर सिंह ने रोगियों में एंजियोग्राफी के बुनियादी सिद्धांतों को कवर किया जबकि एम्स दिल्ली के डॉ. अभिषेक यादव ने वर्चुअल ऑटोप्सी की अवधारणा पेश की जो एक गैर-इनवेसिव पोस्टमॉर्टम तकनीक है। यह पारंपरिक शरीर विच्छेदन से बचने के लिए पूरे शरीर की सीटी स्कैनिंग का उपयोग करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एंजियोग्राफी पोस्टमॉर्टम जांच में कैसे मूल्यवान हो सकती है, खासकर कानूनी मामलों में। एम्स भुवनेश्वर के डॉ. मनोज मोहंती ने आपराधिक मामलों में सांपोंकी भूमिका पर प्रकाश डाला और दर्शकों के साथ कुछ आकर्षक केस अध्ययन शेयर किए।

सीएमई ने एम्स बठिंडा के विभिन्न विभागों के प्रतिभागियों को आकर्षित किया, जिनमें एमबीबीएस छात्र, संकाय और आदेश मेडिकल कॉलेज के छात्र शामिल थे। कार्यक्रम का समापन एक आकर्षक पैनल चर्चा के साथ हुआ, जहां प्रतिभागियों को प्रश्न पूछने का अवसर मिला, इसके बाद समापन सत्र हुआ और एम्स बठिंडा के डॉ. रतन सिंह ने सभी का धन्यवाद किया।
