डॉक्टरों का काम अक्सर चमत्कारों के समान होता है, खासकर जब वे दुर्लभ और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बचाने में कामयाब होते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक मामला फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, दिल्ली में सामने आया है, जहां डॉक्टरों ने बिना सर्जरी किए एक डेढ़ महीने के नवजात के दिल में छेद बंद कर उसे नया जीवन दिया है।

नवजात इस दुर्लभ बीमारी से था पीड़ित

यह नवजात शिशु, जिसका वजन महज 1.8 किलोग्राम था, पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (पीडीए) की समस्या से ग्रस्त था। इस बीमारी में दिल में छेद हो जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह सामान्य रूप से नहीं हो पाता और कई अंगों में खराबी आ सकती है। आमतौर पर पीडीए का इलाज सर्जरी के माध्यम से किया जाता है, लेकिन इस बच्चे के मामले में डॉक्टरों ने नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया का सहारा लिया।

क्यों लिया गया नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया का सहारा

फोर्टिस अस्पताल के डायरेक्टर पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डॉ. नीरज अवस्थी और उनकी टीम ने पिकोलो डिवाइस क्लोजर की मदद से इस छेद को बंद किया। इस प्रक्रिया का चयन इसलिए किया गया क्योंकि बच्चे की हालत पहले से ही नाजुक थी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं, जिसके चलते सर्जरी करना जोखिम भरा हो सकता था। करीब एक घंटे तक चली इस नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया के बाद बच्चे को चार दिनों में स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

शिशु को सांस लेने में हो रही थी कठिनाई

जब बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तो उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उसे सेप्सिस के कारण सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और हार्ट फेल होने के लक्षण भी दिखाई दे रहे थे। उसकी हृदय गति बढ़ी हुई थी, वह बहुत पसीना बहा रहा था, और उसे कुछ भी खिलाना मुश्किल हो रहा था। लीवर भी बढ़ा हुआ था और वजन नहीं बढ़ पा रहा था। इकोकार्डियाग्राम के जरिए यह पता चला कि बच्चे को पीडीए की समस्या थी, जिसमें दिल में छेद होता है। ज्यादातर शिशुओं में यह छेद जन्म के कुछ दिनों के भीतर ही अपने आप सिकुड़ने लगता है, लेकिन अगर यह समस्या बनी रहती है तो फेफड़ों में अतिरिक्त रक्त प्रवाह होने लगता है, जिससे मल्टी-ऑर्गेन डिस्फंक्शन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पिकोलो डिवाइस क्लोजर से सफल हुआ इलाज

इस शिशु की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, यहां तक कि एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं भी उसके लिए कारगर साबित नहीं हो रही थीं। इस स्थिति में डॉक्टरों ने पिकोलो डिवाइस क्लोजर प्रक्रिया का सहारा लिया, जो कम वजन और सेप्सिस के लक्षणों के कारण एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। हालांकि, डॉक्टरों की यह कोशिश सफल रही और अब इलाज के 6 हफ्ते बाद बच्चे की स्थिति में सुधार देखा जा रहा है। उसका वजन बढ़ रहा है और हृदय संबंधी सभी फंक्शन सामान्य हो गए हैं।

पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस क्या है

डॉ. नीरज अवस्थी के अनुसार पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस बच्चों में जन्मजात दोष होता है, जिसका समय पर निदान और इलाज न हो पाने की स्थिति में यह बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस बच्चे के मामले में उसकी नाजुक हालत और कम वजन के चलते दिल का छेद बंद करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन पीडीए डिवाइस क्लोजर के माध्यम से इसे बिना सर्जरी के सफलतापूर्वक किया गया। इससे पहले इस खास प्रक्रिया का इस्तेमाल कुछ ही हाई-रिस्क मामलों में किया गया है, और अगर इस बच्चे का समय पर इलाज नहीं किया जाता, तो उसकी जान बचाना मुश्किल हो जाता।

इस प्रक्रिया की सफलता ने एक और नवजात की जान बचाई है। एक अन्य 1.6 किलोग्राम के शिशु को भी पीडीए 3.5 मिमी के साथ अस्पताल लाया गया था, जिसे सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। इस बच्चे का भी पिकोलो डिवाइस क्लोजर से इलाज सफलतापूर्वक किया गया और उसे भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के फेशिलिटी डायरेक्टर, डॉ. विक्रम अग्रवाल ने इस मामले की चुनौतीपूर्णता पर जोर देते हुए कहा कि नवजात की नाजुक हालत और उम्र के बावजूद अस्पताल के डॉक्टरों ने सटीक मेडिकल मूल्यांकन और सफल प्रक्रियाओं के माध्यम से उसका जीवन बचाने में कामयाबी हासिल की।

By tnm

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