इन दिनों आये दिन मेडिकल क्षेत्र में कई लापरवाही के मामले सामने सामने आ रहे हैं जो काफी हैरान करने वाला होता है। एक ऐसा ही मामला झारखण्ड के देवघर जिले से भी सामने आई है। जहां सारठ प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही देखने को मिली है, जहां एक्सपायरी हो चुकी स्लाइन बोतलों को नियमानुसार डिस्पोज नहीं किया जा रहा है। इसके बजाय इन स्लाइन बोतलों को अस्पताल के टॉयलेट में रखा गया है, जो न केवल स्वास्थ्य और स्वच्छता के मानकों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा उत्पन्न करता है।

अस्पताल के टॉयलेट में रखी गई एक्सपायरी स्लाइन

सारठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के टॉयलेट में एक्सपायरी स्लाइन बोतलें पाए जाने से स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आमतौर पर एक्सपायरी दवाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार सुरक्षित रूप से डिस्पोज किया जाना चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम का कारण न बन सकें। हालांकि इस मामले में ये स्लाइन बोतलें अस्पताल के टॉयलेट में रखी गई हैं, जो अत्यंत अस्वास्थ्यकर और लापरवाही का परिचायक है। यह न केवल अस्पताल के स्वच्छता मानकों को धूमिल करता है, बल्कि वहां आने वाले सैकड़ों मरीजों के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा करता है।

सैकड़ों मरीज करते हैं अस्पताल का उपयोग

सारठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में टॉयलेट में एक्सपायरी स्लाइन बोतलों का रखा जाना समझ से परे है। टॉयलेट का उपयोग करने वाले मरीज और उनके परिजन इस अस्वच्छता के सीधे संपर्क में आ सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा इस लापरवाही से अस्पताल की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है।

कर्मचारियों की प्रतिक्रिया

जब इस मामले में ईटीवी भारत की टीम ने अस्पताल के कर्मचारियों से बात करने की कोशिश की, तो अधिकांश कर्मचारी कैमरे पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। हालांकि ऑफ कैमरा, कुछ कर्मचारियों ने इस स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि अस्पताल में स्थान की कमी के कारण, एक्सपायरी स्लाइन बोतलों को अस्थायी रूप से टॉयलेट में रखा गया है। यह बयान अस्पताल प्रशासन की कुप्रबंधन और अव्यवस्था को उजागर करता है, जो कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान के लिए एक गंभीर मुद्दा है।

नियमित जांच की आवश्यकता

सारठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इस लापरवाही का मामला सामने आने के बाद, देवघर के सिविल सर्जन डॉ. रंजन सिन्हा ने कहा कि सामान्यतः एक्सपायरी दवाओं को स्टोर रूम से हटाकर सुरक्षित रूप से डिस्पोज किया जाता है। लेकिन जगह की कमी के कारण, कभी-कभी उन्हें अस्थायी रूप से अन्य स्थानों पर रखा जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक्सपायरी दवाओं की जांच के लिए चिकित्सकों की एक टीम बनाई जाती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि दवाओं को सही तरीके से डिस्पोज किया जाए। इस मामले में सिविल सर्जन ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया है और आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

By tnm

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