कोलकाता में एक ट्रेनी डॉक्टर की हत्या और रेप के मामले में सीबीआई जांच कर रही है। इस केस में आरोपी संजय रॉय का साइकोलॉजिकल टेस्ट किया गया है। इस टेस्ट के दौरान संजय से कई सवाल पूछे गए, जिनमें उसके मोबाइल फोन में मिले पॉर्न वीडियो और रेड लाइट एरिया में जाने की आदत को लेकर भी जांच की गई। टेस्ट के दौरान संजय ने कबूल किया कि वारदात के दिन उसने पॉर्न वीडियो देखे थे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि संजय सैटीरियासिस (हाइपरसेक्सुअलिटी) नामक बीमारी से पीड़ित हो सकता है।

क्या है हाइपरसेक्सुअलिटी डिसऑर्डर

हाइपरसेक्सुअलिटी एक मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण खो देता है। एम्स दिल्ली के पूर्व मनोचिकित्सक डॉ. राजकुमार के अनुसार, यह समस्या ब्रेन के पाथवे में गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होती है। जब ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर, जैसे सेरोटोनिन, डोपामाइन और नॉरपेनेफ्रिन असंतुलित हो जाते हैं, तो व्यक्ति की यौन इच्छाएं अत्यधिक बढ़ जाती हैं। इसके कारण व्यक्ति अनियंत्रित यौन व्यवहार करने लगता है, जो उसके मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है।

हाइपरसेक्सुअलिटी के लक्षण और प्रभाव

हाइपरसेक्सुअलिटी से पीड़ित व्यक्ति अक्सर अपनी यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाता है, जैसे बार-बार पॉर्न वीडियो देखना, हस्तमैथुन करना, या जोखिम भरे यौन व्यवहार में शामिल होना। ऐसे व्यक्तियों के दिमाग में हमेशा अश्लील ख्याल आते रहते हैं, और अगर उनकी इच्छाएं पूरी नहीं होती, तो वे मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं। वहीं ऐसे व्यक्ति किसी भी हद तक जा सकते हैं, यहां तक कि आपराधिक कृत्यों में शामिल हो सकते हैं, बिना किसी पछतावे के।

क्या हाइपरसेक्सुअलिटी का इलाज संभव है

हाइपरसेक्सुअलिटी का इलाज मुमकिन है। काउंसलिंग और दवाओं की मदद से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है। इसके अलावा शराब या नशे की लत को नियंत्रित करना भी आवश्यक है, क्योंकि ये चीजें ब्रेन के केमिकल संतुलन को बिगाड़ सकती हैं, जिससे ऐसे विकारों का खतरा बढ़ता है।

साइकोलॉजिकल टेस्ट की प्रक्रिया

साइकोलॉजिकल टेस्ट एक वैज्ञानिक तरीका है, जिससे आरोपी की मानसिक स्थिति और व्यवहार का विश्लेषण किया जाता है। इसमें आरोपी को विभिन्न प्रकार की तस्वीरें दिखाई जाती हैं और उसके प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इस दौरान आरोपी से केस से संबंधित सवाल भी पूछे जाते हैं। साइकोलॉजिकल टेस्ट के माध्यम से विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश करते हैं कि आरोपी की सोचने और समझने की क्षमता कैसी है और उसके व्यवहार में क्या असामान्यताएं हो सकती हैं।

By tnm

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