दुनियाभर से कई अजीबो गरीब मामले सामने आते हैं जो काफी हैरान करने वाले होते हैं। एक ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक अत्यंत दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई है, जहां एक नाई की लापरवाही के कारण डेढ़ महीने के मासूम की जान चली गई। यह घटना फतेहगंज के पूर्वी थाना क्षेत्र के शिवपुरी गांव की है, जहां एक गरीब परिवार का नवजात बच्चा खतना के दौरान अपनी जान गंवा बैठा।
500 रुपये में कराया खतना, कट गई गलत नस
मासूम के पिता शरीफ अहमद जो आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हैं, अपने बेटे अरमान का खतना कराने की सोच रहे थे। चूंकि उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, वे एक स्थानीय नाई कबीर से मिले, जिसने मात्र 500 रुपये में खतना करने की बात कही। 11 अगस्त को सुबह करीब 11:30 बजे कबीर ने बच्चे का खतना किया। दुर्भाग्यवश इस प्रक्रिया के दौरान नाई ने गलत नस काट दी, जिससे बच्चे की अत्यधिक ब्लीडिंग होने लगी। परिजन जब तक कुछ समझ पाते, तब तक बच्चे की हालत गंभीर हो चुकी थी।
ब्लीडिंग के कारण हुई मासूम की मौत
खून का बहाव रुकने का नाम नहीं ले रहा था, और बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। अंततः, इस भयंकर लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हो गई। इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मासूम के पिता शरीफ अहमद ने तुरंत नाई कबीर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धारा 304 बी के तहत एफआईआर दर्ज की है और बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
नाई फरार, पुलिस तलाश में जुटी
घटना को अंजाम देने के बाद नाई कबीर फरार हो गया है। पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है और जल्द ही उसे पकड़ने का दावा किया है। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है, और लोग इस तरह की लापरवाही को लेकर आक्रोशित हैं।
विशेषज्ञों की सलाह, खतना एक सर्जिकल प्रक्रिया
वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी सामाजिक रीति-रिवाज, जैसे कि खतना को करवाने के लिए विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन किसी सर्जन द्वारा ही किया जाना चाहिए और इस प्रक्रिया को किसी बाहरी व्यक्ति से करवाने की सलाह नहीं दी जा सकती। खतना एक सर्जिकल प्रक्रिया होती है, जिसमें सेप्सिस और ब्लीडिंग जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है।
साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि गरीब परिवारों को सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का सहारा लेना चाहिए, जहां सर्जन मुफ्त में ऑपरेशन करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सर्जिकल प्रक्रियाओं को किसी अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा कराने से कितना बड़ा खतरा हो सकता है।
