यूनाइटेड किंगडम (UK) की पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम और नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) ने हाल ही में एक नई और विवादास्पद पॉलिसी लागू की है। इस पॉलिसी के तहत सभी पुरुष मरीजों जिनकी उम्र 12 से 55 साल के बीच है, उनसे X-ray के लिए आने पर पूछा जा रहा है कि क्या आप गर्भवती हैं? बता दें कि यह कदम ट्रांसजेंडर, नॉन-बाइनरी और इंटरसेक्स मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि इस नीति ने व्यापक असंतोष और विवाद पैदा कर दिया है।
नीति का कारण और पृष्ठभूमि
यह नई पॉलिसी उस घटना के बाद लागू की गई थी जब एक ट्रांसजेंडर पुरुष ने गर्भवती होते हुए CT स्कैन करवाया था। इस घटना ने NHS को यह सोचने पर मजबूर किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की अनदेखी और भेदभाव से बचने के लिए सभी मरीजों को समान रूप से और संवेदनशीलता के साथ ट्रीट किया जाए। नई पॉलिसी के तहत अस्पतालों में मरीजों से उनके जन्म के समय का लिंग, पसंदीदा नाम, और प्रोनाउन जैसी जानकारी भी मांगी जा रही है।
विवाद और आलोचना
हालांकि यह पॉलिसी लागू होने के बाद से ही विवादों में घिर गई है। कई विशेषज्ञों और कैम्पैनर ने इस पॉलिसी की कड़ी आलोचना की है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसे मानसिक रूप से कष्टकारी और अपमानजनक करार दिया है। विशेष रूप से जो मरीज कैंसर जैसी संवेदनशील स्वास्थ्य स्थितियों के लिए बार-बार X-ray करवाते हैं, वे इस पॉलिसी से नाराज हैं।
लोगों ने अपॉइंटमेंट्स छोड़े
रेडियोलॉजिस्टों ने भी बताया है कि इस प्रश्न को बार-बार पूछे जाने से मरीजों की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वहीं एक रेडियोलॉजिस्ट ने बताया कि एक मरीज को लगातार स्कैन के लिए आना पड़ रहा था, और बार-बार यह सवाल पूछे जाने के कारण उसने अपनी पहचान पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। इसके अलावा कुछ महिलाओं ने भी इस नीति के कारण भावुक हो जाने की बात कही है, और कई पुरुषों ने तो अपनी अपॉइंटमेंट्स ही छोड़ दी हैं।
मेंटल हेल्थ पर प्रभाव
यह पॉलिसी उन लोगों के लिए विशेष रूप से मुश्किल हो सकती है, जिन्होंने गर्भपात का अनुभव किया है। बार-बार गर्भवती होने के बारे में पूछे जाने से वे अपने पुराने दर्दनाक अनुभवों को दोबारा महसूस कर सकते हैं, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इस प्रकार की प्रतिक्रिया को देखते हुए NHS ट्रस्ट्स और हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर पर इस पॉलिसी के प्रभाव और इसके एग्जीक्यूशन पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
लोगों की प्रतिक्रिया
NHS की यह नई नीति, जो ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई थी, अब विवाद का केंद्र बन गई है। नीति के आलोचक इसे हटा देने की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे सुधारने की सलाह दे रहे हैं। NHS के लिए इस नीति को संतुलित तरीके से लागू करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसमें सभी मरीजों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए समग्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक होगा।
