दिल्ली-NCR जैसी जगह जो दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है, वहां AQI का स्तर 450-500 तक पहुंचता था। लेकिन मॉनसून की वजह से इस बार AQI का स्तर 50 से भी नीचे आ गया है। बारिश ने हवा को साफ कर दिया है, जिससे लोग राहत की सांस ले रहे हैं। हालांकि इस नमी से अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। मॉनसून के दौरान बढ़ी हुई ह्यूमिडिटी सांस की नली में सूजन, सीने में जकड़न, और फेफड़ों को प्रॉपर ऑक्सीजन न मिलने जैसी समस्याओं को बढ़ा देती है।
फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए खासकर मानसून के समय सावधानी बरतनी जरूरी है। योग-प्राणायाम जैसे उपाय इस समय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। आइए जानते हैं योग और आयुर्वेद के उन उपायों के बारे में जो फेफड़ों को मजबूत बनाएंगे और अस्थमा, सीओपीडी, और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाएंगे।
दिल्ली-NCR में AQI स्तर में गिरावट
दिल्ली-NCR के विभिन्न इलाकों में AQI का स्तर मॉनसून के कारण काफी कम हो गया है। न्यू मोती बाग में AQI 38, जेएनयू स्टेडियम में 43, सिरिफोर्ट में 49, और नोएडा के सेक्टर-116, सेक्टर-125, और सेक्टर-1 में क्रमशः 42, 50, और 58 AQI दर्ज किया गया। यह गिरावट एयर क्वालिटी में सुधार का संकेत है, लेकिन यह सभी के लिए अच्छी खबर नहीं है। विशेषकर अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी रोगों से ग्रस्त लोगों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
कमजोर लंग्स के कारण होने वाली बीमारियां
फेफड़ों की कमजोरी से अस्थमा, ट्यूबरक्लोसिस, फाइब्रोसिस, लंग्स कैंसर, ब्रोंकाइटिस, और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मॉनसून के दौरान एलर्जी और रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर के मामले भी बढ़ सकते हैं। नाक बंद होना, चेस्ट कंजेशन, बार-बार छींक आना, आंखों का लाल होना, बदन पर रैशेज, वायरल बुखार, और इनडाइजेशन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।
मॉनसून में किससे बचें
मॉनसून के समय बैक्टीरिया, वायरस, फंगस, और पोलन से बचाव करना चाहिए। ये एलर्जन सांस की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर, लंग्स में इंफेक्शन, और सांस की नली में सिकुड़न जैसी समस्याओं से बचने के लिए सावधानी बरतना जरूरी है।
अस्थमा पेशेंट्स के लिए सावधानियां
अस्थमा के मरीजों को खासकर जुकाम से बचना चाहिए। गर्म चीजें खाएं-पीएं, गुनगुना पानी पीएं, और नमक डालकर गरारे करें। नाक में अणु तेल डालें और अदरक, लौंग, दालचीनी का काढ़ा, तथा तुलसी, अदरक, काली मिर्च वाली चाय का सेवन करें।
लंग्स को मजबूत करने के उपाय
लंग्स को मजबूत बनाने के लिए गिलोय का काढ़ा पिएं, तुलसी के पत्ते चबाएं, अनुलोम-विलोम करें, और रोज प्राणायाम करें। दूध में हल्दी मिलाकर पीएं, त्रिकुटा पाउडर लें, और रात को स्टीम लें। ये उपाय लंग्स की शक्ति बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।
अस्थमा में राहत के उपाय
सोते वक्त तलवों पर गर्म सरसों का तेल लगाएं, नाभि में सरसों का तेल डालें, और नाक में सरसों का तेल डालें। खांसी के लिए 100 ग्राम बादाम, 20 ग्राम काली मिर्च, और 50 ग्राम शक्कर मिलाकर एक चम्मच इस मिश्रण को दूध के साथ लेने से राहत मिलेगी।
