अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) ने हाल ही में फसलों में इस्तेमाल होने वाले एक कीटनाशक, डैचल पेस्टिसाइड, को सेहत के लिए बड़ा खतरा बताया है। यह कीटनाशक गर्भ में पल रहे बच्चों के लिए भी खतरनाक हो सकता है, और अमेरिका ने इसे तुरंत बाजार से हटाने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि कीटनाशकों के शरीर पर कौन-कौन से प्रभाव हो सकते हैं और कैसे ये हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
कीटनाशकों का उपयोग और उनके खतरे
फसलों की पैदावार से लेकर सब्जियों की थाली तक कई प्रकार के केमिकल्स का उपयोग किया जाता है। शुरुआत में कीटनाशकों का इस्तेमाल फसलों से कीड़ों को दूर करने के लिए किया जाता है, और सब्जियों को फ्रेश और आकर्षक दिखाने के लिए भी कई केमिकल्स डाले जाते हैं। लेकिन इन केमिकल्स का मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो सकता है।
डैचल पेस्टिसाइड जैसे कीटनाशक ब्रसेल्स स्प्राउट्स, प्याज, गोभी और ब्रॉकोली जैसी सब्जियों में इस्तेमाल किए जाते हैं। अमेरिकी ईपीए का कहना है कि अगर प्रेगनेंट महिलाएं इन सब्जियों का सेवन करती हैं, तो इससे उनके बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
कीटनाशकों से प्रभावित अंग
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के पूर्व मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुभाष गिरी के अनुसार कीटनाशकों में मौजूद केमिकल शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कीटनाशकों में ऑर्गेनोफ़ॉस्फ़ेट और कार्बामेट जैसे खतरनाक तत्व शामिल हो सकते हैं, जो स्किन, आंखों और हार्ट को प्रभावित कर सकते हैं। इन केमिकल्स के प्रभाव से नसों को भी नुकसान पहुंच सकता है, और यह सांस लेने में परेशानी का कारण बन सकता है।
पुराने कीटनाशक जैसे डीडीटी और लिंडेन जो मिट्टी और पानी में लंबे समय तक बने रहते हैं, भी शरीर पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि इन पर कई देशों में प्रतिबंध है, फिर भी इनका उपयोग कई जगहों पर जारी है।
बाजार में सब्जियों में डाले जाने वाले केमिकल्स
बाजार में सब्जियों को चमकाने और आकर्षक बनाने के लिए आर्टिफिशियल रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। ये रंग जैसे रोडामाइन-बी और ऑरामीन, सब्जियों को तीव्र रंग प्रदान करते हैं, लेकिन ये कैंसर का कारण बन सकते हैं और कई अंगों को प्रभावित कर सकते हैं।
कीटनाशकों के असर के संकेत
वहीं कीटनाशकों के लंबे समय तक सेवन से आंखों में आंसू आना, नजर का धुंधला होना, ज्यादा पसीना आना, खांसी और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा ब्लड प्रेशर घटने और हार्ट डिजीज का जोखिम भी बढ़ सकता है।
