बहुत बार ऐसा होता है कि जब हमें बुखार आता है तो हम घर में रखी हुई बुखार की मेडिसिन पेरासिटामोल को खा लेते हैं और हमें जल्दी से आराम भी आ जाता है। डॉक्टर भी बुखार में पेरासिटामोल मेडिसिन ही देता है। उनका मानना है की ये सबसे सुरक्षित है क्योंकि इसके साइड इफेक्ट अन्य पेनकिलर्स के मुकाबले काफी कम होते हैं। हालांकि पैरासिटामोल की अत्यधिक डोज लिवर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वहीँ बहुत से लोग मानते हैं कि यह दवा लिवर को डैमेज करने का काम करते हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है। तो आज इसी के बारे में जानते हैं।
डॉक्टर ने बताया
दरअसल नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा के मुताबिक ज्यादातर दवाइयां हमारे लिवर में मेटाबॉलाइज हो जाती हैं और इसका असर लिवर हेल्थ पर पड़ता है। पैरासिटामोल भी लिवर में मेटाबॉलाइज होती है और अगर सही मात्रा में इसे लेते हैं तो लिवर को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। वहीँ इसे सबसे सेफ दवा माना जाता है और इसी वजह से यह दवा भारत समेत अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी ओवर द काउंटर आसानी से मिल जाती है।
एक दिन इतनी मात्रा में लें ये दवा
वहीँ लिवर एक्सपर्ट बताते हैं कि पैरासिटामोल टेबलेट अन्य पेनकिलर्स के मुकाबले ज्यादा सेफ है, क्योंकि यह पेट को इरिटेट नहीं करती है। वहीँ बुखार या दर्द होने पर दिन में जरूरत के अनुसार 2 या 3 बार पैरासिटामोल टेबलेट ले सकते हैं। अक्सर डॉक्टर लोगों के वजन के मुताबिक डोज तय की जाती है और उसी तरह दवा लेने की सलाह देते हैं। डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल को लंबे समय तक लिया जा सकता है।
पैरासिटामोल पॉइजनिंग भी हो सकती है
डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि अमेरिका और यूरोप में एक्यूट लिवर फेलियर के मामले सबसे ज्यादा है, इसकी वजह पैरासिटामोल पॉइजनिंग है। हालांकि यह कंडीशन तब पैदा होती है, जब कोई व्यक्ति एक ही साथ पैरासिटामोल की 10 या 20 गोलियों का सेवन करता है। इतनी हाई डोज लेने पर एक्यूट लिवर फेलियर की संभावना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं सही समय पर इलाज न मिलने से व्यक्ति की मौत तक हो सकती है। अक्सर अमेरिका और यूरोप में सुसाइड करने के लिए लोग पैरासिटामोल की कई गोलियां एक साथ खा लेते हैं। हालांकि ऐसी कंडीशन में लोगों की जान बचाने के कई तरीके होते हैं।
