बीते कुछ समय से महिला कर्मचारियों की मासिक धर्म के मुद्दे को लेकर लगातार कानूनी चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में हाल ही में किये गए लोकसभा सेशन में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने स्पष्टरूप से कहा कि भारत सरकार वर्तमान में सभी कार्यस्थलों के लिए भुगतान वाली मासिक धर्म छुट्टी को अनिवार्य करने की योजना नहीं बना रही है। इसके बजाय सरकार मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि वर्तमान में इस मुद्दे पर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
मासिक धर्म स्वच्छता के लिए विभिन्न योजनाओं की शुरुआत
मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की है। 10 से 19 वर्ष की किशोरियों को मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) के माध्यम से सब्सिडी वाले सैनिटरी नैपकिन प्रदान किए जाते हैं। इस योजना का समर्थन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन करता है, जो मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों को फंड करता है। इसके अलावा स्वच्छ भारत अभियान के हिस्से के रूप में पेयजल और स्वच्छता विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) के लिए राष्ट्रीय दिशा निर्देश स्थापित किए हैं।
1 रुपये प्रति पैड की दर से सस्ती दवाईयां उपलब्ध
महिलाओं के स्वास्थ्य को और बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत मात्र 1 रुपये प्रति पैड की दर से सस्ती दवाईयां और ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाते हैं। देशभर में 10,000 से अधिक जन औषधि केंद्र इन उत्पादों का वितरण करते हैं।
मासिक धर्म अवकाश से संबंधित आदेश जारी
हाल ही में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को मासिक धर्म अवकाश से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त हुआ है, जो इस विषय पर चल रही कानूनी और नीतिगत चर्चाओं को दर्शाता है। बता दें कि भारत में मासिक धर्म अवकाश के मुद्दे पर बढ़ती चर्चा और वकालत की जा रही है।
वहीं पिछले साल नवंबर में गुवाहाटी विश्वविद्यालय ने महिला छात्राओं को विशेष छूट प्रदान की। विश्वविद्यालय के कुलपति ने सभी विभागों और संबद्ध कॉलेजों के लिए न्यूनतम कक्षा उपस्थिति में 2 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की थी। इस छूट के तहत महिला छात्राओं को मासिक धर्म अवकाश के लिए न्यूनतम 73 प्रतिशत कक्षा उपस्थिति की आवश्यकता होगी।
इस कंपनी ने मासिक धर्म अवकाश की नीति शुरू की
मुंबई में एक प्रमुख डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी द सोशल लायंस ने 2023 से अपनी महिला कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश नीति शुरू की है। यह नीति एक सहायक और समावेशी कार्य वातावरण बनाने की दिशा में कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस नीति के तहत महिला कर्मचारियों को 2 दिन तक मासिक धर्म अवकाश लेने की अनुमति दी गई है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार ने सभी कार्यस्थलों के लिए भुगतान वाली मासिक धर्म छुट्टी को अनिवार्य करने की योजना को अभी स्वीकार नहीं किया है। विभिन्न संगठन और विश्वविद्यालय इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठा रहे हैं और जागरूकता बढ़ा रहे हैं।
