मेडिकल की दुनिया में आये दिन बड़े बड़े कारनामों की चर्चा होती रहती है। लेकिन इस बीच एक ऐसा मामला आमने आया है, जहां एक अस्पताल में महिला की डिलीवरी बिजली के आभाव में टॉर्च में कर दी गयी। ये मामला पटियाला के राजिंदरा अस्पताल का है।
अन्य वार्डों में रही बिजली गुल
आपको बता दें इस अस्पताल में 25 वार्डों में अंधेरे और 36 डिग्री सेल्सियस तापमान के चलते मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि जेनरेटर की मदद से इमरजेंसी वार्ड में तो जांच के लिए बिजली की व्यवस्था रही, लेकिन अन्य वार्डों में बिजली गुल रही।
टॉर्च की मदद से की गयी डिलीवरी
बता दें इस असपताल के हालात इतने खराब थे कि गायनी वार्ड में डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की मदद से एक डिलीवरी करवाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जहां चीफ सेक्रेटरी अनुराग वर्मा ने मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं, वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने खुद अधिकारियों के साथ मीटिंग करके इस समस्या के स्थाई हल पर चर्चा की।
मरीजों के तीमारदारों ने जताया रोष
वहीँ अस्पताल में दाखिल मरीजों के तीमारदारों ने भी बिजली गुल रहने से परेशान होकर इमरजेंसी के बाहर बैठकर रोष प्रकट किया। मरीजों के तीमारदारों ने आरोप लगाया कि रोजाना बिजली गुल हो जाती है। चार व्यक्ति मरीज को पंखी से हवा देने के लिए मजबूर हैं, ताकि मरीज को गर्मी और इन्फेक्शन से बचाया जा सके।
उमस भरी गर्मी में बिजली गुल रहने के कारण मरीजों को इन्फेक्शन का खतरा तो है ही, साथ ही सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। बता दें कि सरकारी राजिंदरा अस्पताल मालवा बेल्ट का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है और अस्पताल में पटियाला समेत आसपास के करीब पांच जिलों के मरीज इलाज के लिए आते हैं।
नई लाइनें डालने का कोई लाभ नहीं है
बता दें इससे पहले भी करीब दस दिन पहले राजिंदरा अस्पताल की ओपीडी में बिजली गुल हो गई थी। जिस कारण अस्पताल का स्टाफ इमरजेंसी में बैठकर पर्चियां काटने को मजबूर था। वें नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि जब से ग्रिड से नई लाइनें डाली गई हैं, तब से हाट लाइन होने के बावजूद कुछ दिनों बाद ही पावर सप्लाई बंद हो जाती है।
इतना ही नहीं अस्पताल के क्वार्टर में रहने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि हाट लाइन होने के चलते पहले क्वार्टरों में भी लाइट नहीं जाती थी। अब अस्पताल में ही एक दो दिन बाद बत्ती गुल रहती है।
