जब कोई डॉक्टर किसी मरीज को ठीक करके उसे घर भेज ददेता है तो मरीज के परिवार वाले डॉक्टर को बहुत सी दुआएं देते हैं। ऐसे में डॉक्टर को जो ख़ुशी मिलती हैं, उसका अंदाजा भी लगा पाना आप हम सबके लिए मुश्किल काम है। दरअसल जबलपुर के डॉक्टर मरिजों को न सिर्फ ठीक करते हैं बल्कि उनका सारा इलाज मुफ्त में करते हैं।

नर्वस सिस्टम से जुडी बिमारियों का करते हैं इलाज

जबलपुर के डॉक्टर मिर्गी, ब्रेन ट्यूमर, लकवा, ब्रेन स्ट्रोक आदि घातक बीमारियों में मरीजों का दर्द मिटाकर उनके चेहरे पर मुस्कान ला रहे हैं। जबलपुर नर्वस सिस्टम की जटिल बीमारियों के उपचार का बड़ा केंद्र बन गया है। कई बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों के स्तर पर प्रदेश में केवल मेडिकल कॉलेज जबलपुर के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में ही सुलभ है। इसी कारण न्यूरोलॉजी से संबंधित कई मरीजों को इलाज के लिए भोपाल एस से मेडिकल के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया जाने लगा है।

मिर्गी की होती है सर्जरी

मिर्गी के मरीज और उनके परिजन को काफी तनाव होता है। ऐसे में उन्हें डर होता है कि कब, कहां दौरा पड़ जाए।कुछ  मरीजों को तो दवाइयों से आराम मिल जाता है, लेकिन कई मरीजों को लंबे इलाज के बाद भी दौरे पड़ते हैं। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विशेषज्ञ मिर्गी के कई मरीजों की सफल सर्जरी कर चुके हैं। प्रदेश में मिर्गी के मरीजों की सर्जरी केवल जबलपुर में हो रही है। निजी अस्पतालों में मिर्गी की सर्जरी पर 5 से लेकर 30 लाख रुपये तक का खर्चा आता है। यहां मरीजों की नि:शुल्क सर्जरी की जा रही है।

ब्रेन स्ट्रोक का उपचार

विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन एन्युरिज्म ऐसी बीमारी है, जिनके फटने से ब्रेन स्ट्रोक आता है। इससे मरीज के अपंग होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। कई मामलों में मृत्यु भी हो जाती है। मेडिकल के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में अभी तक 4 सौ के लगभग मरीजों का इलाज हो चूका है। इस विधि में जांघ की नस में की-होल से एक सूक्ष्म कैथेटर पहुंचाकर मस्तिष्क के एन्यूरिज्म को अंदर से बंद कर दिया जाता है। इस विधि से चिकित्सा की सुविधा देश में कुछेक संस्थानों में ही उपलब्ध है। मरीज को किसी और प्रकार की समस्या नहीं होने पर 5-6 दिन में छुट्टी मिल जाती है। ब्रेन एन्युरिज्म का इस पद्धति से इलाज महानगरों के निजी अस्पतालों में ही संभव है, जहां इलाज पर 6-7 लाख रुपये खर्च होते हैं।

स्पास्टिसिटी का निदान

लकवा लगने से पैरों में कठोरता, टेढ़ेपन की बीमारी स्पास्टिसिटी का मेडिकल के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में सर्जरी से सफल इलाज किया जा रहा है। न्यूरो विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार लकवा के ऐसे मामलों में पैरों की नस हाइपर एक्टिव हो जाती है। सर्जरी के माध्यम से नसों इस समस्या को दूर किया जाता है। व्यक्ति फिर से चलने-फिरने लगता है। प्रदेश में स्पास्टिसिटी की बीमारी से पीड़ित मरीजों की सर्जरी की सुविधा केवल जबलपुर में है।

मिग्री, स्पास्टिसिटी की सर्जरी और ब्रेन स्ट्रोक का क्वाइलिंग तकनीक से सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। रोगियों की पहचान व समय पर इलाज के लिए अलग से ओपीडी भी संचालित की जा रही है।

By tnm

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