आज कल के लाइफस्टाइल को देखते हुए कई तरह के कैंसर लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं। ऐसे में 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित मैमोग्राफी टेस्ट हर महिला को करवाना जरुरी है, ताकि महिला को पता चल सके कि उन्हें स्तन कैंसर की शुरुआत तो नहीं हो रही। दरअसल जालंधर के न्यू रूबी अस्पताल और लुधियाना के विश्व कैंसर केंद्र की तरफ से विभिन्न प्रकार के कैंसर के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वहीँ इस वर्कशॉप में न्यू रूबी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. एसपीएस ग्रोवर ने सभी का स्वागत किया।

कैंसर की रोकथाम के बारे में कही ये बात

डब्ल्यूसीसी की ऑन्को-विशेषज्ञ डॉ. जसपिंदर कौर ने कैंसर की रोकथाम और शीघ्र पता लगाने के विषय पर बात करते हुए बताया कि पहले इसके लक्षणों को पहचानने की जरूरत है जिनमे पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान, मोटापा, जंक फूड, अत्यधिक शराब का सेवन शामिल है। उन्होंने विभिन्न प्रकार के कैंसर और रेडियोथेरेपी की भूमिका और लेटेस्ट  तकनीकों के बारे में कहा कि अब कैंसर को ठीक करने में इनकी अहम भूमिका है। जिसका लाभ पेशेंट को मिलता है।

इसका निशुल्क इलाज संभव

डब्ल्यूसीसी के निशांत वर्मा ने बताया कि कैंसर का इलाज आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के तहत निःशुल्क भी कराया जा सकता है। इसके लिए पेशेंट को अपने डॉक्टर से इसके बारे में जानकारी लेने की आवश्कता है।

धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर

इस वर्कशॉप में न्यू रूबी हॉस्पिटल के डॉ. पुनीत ग्रोवर ने प्रोस्टेट कैंसर के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर होता है। वहीँ उन्होंने कहा कि अगर समय से पता चल जाये तो इसका इलाज संभव है, ऐसे में पीएसए के लिए ब्लड टेस्ट का होना जरुरी है।

वहीँ उन्होंने पीएसए और प्रोस्टेट रोग के मिथकों और वास्तविकताओं के बारे में भी ठीक से समझाया। इसके अलावा अगर कैंसर का जल्दी पता चल जाए तो सर्जरी के माध्यम से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। वहीँ आज कल इसकी सर्जरी, रोबोटिक सर्जरी के जरिये काफी आसान हो गयी है।

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण

इस मौके पर डॉ. हरनीत ग्रोवर ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि 9-14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए इसका टीकाकरण बेहद जरुरी है। साथ ही पहले यौन संपर्क से पहले ही महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम का टिका लगवाना बेहद जरुरी है।

उन्होंने ये भी कहा कि सर्वाइकल कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए पीएपी स्मीयर टेस्ट जरुरी है। वहीँ 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं में इसका डिटेक्शन करना मुश्किल हो जाता है।

ये डॉक्टर्स रहे मौजूद

इस मौके पर सिविल अस्पताल के ईएसआई, पीआईएमएस और पारिवारिक चिकित्सकों के डॉक्टरों ने भाग लिया जिनमे डॉ. के.एस. खेड़ा, डॉ. गौरव, डॉ. बलजिंदर सिंह, डॉ. मोहिंदर सिंह, डॉ. बलवंत राय, डॉ. पीयूष कुमार, डॉ. चंचल सिंह, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. राकेश कलसी, डॉ. दिमेश शर्मा, डॉ. निपुण कक्कड़, डॉ. जीएस बब्बर, डॉ. पीआर चौधरी, डॉ. अश्वनी महेंदर, डॉ. सेठी, डॉ. हरविंदर पाल सिंह, डॉ. राजेश मोहन, डॉ. प्रमोद, डॉ. जयदीप, डॉ. अशपके, डॉ. हरविंदर सिंह, डॉ. राजिंदर, डॉ. भूपिंदरम डॉ. सचिन, डॉ. हवरिंदर कौर, डॉ. गगन प्रीत सिंह, डॉ. पी.एस अरोड़ा, डॉ. मोहिंदर निर्मल, डॉ. एमएस तेजी, डॉ. दलीप कुमार, डॉ. इंद्रजीत धमीजा, डॉ. नरिंदर धमीजा, डॉ. एचएस बिंद्रा, डॉ. बीएस बिंद्रा मौजूद रहे।

By tnm

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